राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देश में गैर-कानूनी घुसपैठ पर चिंता जताते हुए लोगों से सतर्क रहने और घुसपैठियों की पहचान कर प्रशासन को जानकारी देने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे लोगों को देश में रोजगार न मिले।
मंगलवार को Vrindavan के रुक्मिणी विहार स्थित नव-निर्मित जीवनदीप आश्रम के लोकार्पण कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने वैश्विक राजनीति, जनसंख्या नीति और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी विस्तार से अपने विचार रखे।
अमेरिका और चीन की आक्रामक प्रवृत्ति पर टिप्पणी
अपने संबोधन में भागवत ने United States और China जैसे देशों की आक्रामक प्रवृत्ति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कई देश अपने आर्थिक या राजनीतिक मॉडल को दुनिया पर थोपने की कोशिश करते हैं।
भागवत ने कहा कि अमेरिका यह दावा कर सकता है कि उसका आर्थिक मॉडल सबसे अच्छा है और सभी देशों को उसका अनुसरण करना चाहिए, जबकि चीन भी अपने मॉडल को सर्वोत्तम बता सकता है। इसके विपरीत भारत का दृष्टिकोण अलग है। भारत दूसरों पर कुछ थोपने में विश्वास नहीं करता और यह मानता है कि हर समाज का अपना दृष्टिकोण और रास्ता हो सकता है।
तीन बच्चों की नीति पर जोर
आरएसएस प्रमुख ने जनसंख्या नीति पर भी बात करते हुए कहा कि परिवारों को दो के बजाय तीन बच्चों का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर भी स्वस्थ पारिवारिक वातावरण के लिए तीन बच्चों की सलाह देते हैं, क्योंकि भाई-बहनों के बीच संवाद से सामाजिक कौशल विकसित होते हैं और समूह में सामंजस्य बैठाने की क्षमता बढ़ती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रजनन दर लगातार तीन से नीचे रहती है तो लंबे समय में समाज के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इसलिए भारत की जनसंख्या नीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत है।
जबरन धर्मांतरण पर रोक की अपील
भागवत ने जबरदस्ती धर्मांतरण को समाप्त करने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार कानून बना सकती है, लेकिन समाज को भी इस तरह की गतिविधियों को रोकने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों में चले गए हैं, वे हिंदुओं के वंशज हैं और यदि वे वापस लौटना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए।
आश्रमों की भूमिका पर जोर
कार्यक्रम के दौरान भागवत ने आश्रम परंपरा को भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि “आश्रम” शब्द का किसी अन्य भाषा में सटीक अनुवाद नहीं है और यह केवल धार्मिक स्थान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और ज्ञान का केंद्र भी होता है।
उन्होंने कहा कि आज की अशांत दुनिया में भारत के प्राचीन सांस्कृतिक मूल्य और सनातन परंपराएं समाज को दिशा देने में सक्षम हैं, और आश्रम इस विरासत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इस कार्यक्रम में Mohan Yadav, Brajesh Pathak सहित कई संत-महात्मा और गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।














