Tuesday, February 3, 2026
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SIR को लेकर ममता बनर्जी बनाम चुनाव आयोग: सुप्रीम कोर्ट में टकराव, बुधवार को होगी सुनवाई

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा लागू की जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर कर दी है। इस याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है, जिससे ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच चल रहा टकराव और गहरा गया है।

ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्रतिवादी बनाया है। उन्होंने बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया को मनमाना, असंवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए इसकी वैधता को चुनौती दी है।

पार्टी इन पर्सन के रूप में कोर्ट में होंगी पेश

यह याचिका एक रिट याचिका है, जिसमें याचिकाकर्ता को निजी तौर पर कोर्ट में पेश होकर अपनी बात रखने का अधिकार होता है। सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी इस मामले में पार्टी इन पर्सन के रूप में अदालत के समक्ष अपनी बात रख सकती हैं, हालांकि वे वकील के रूप में नहीं बल्कि याचिकाकर्ता के तौर पर उपस्थित होंगी।

बिहार के बाद 12 राज्यों में SIR का फैसला

गौरतलब है कि बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्र सरकार ने देश के 12 राज्यों में SIR लागू करने का निर्णय लिया, जिनमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है। इसके बाद से ही विपक्षी दल लगातार इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं और इसे चुनावी हेरफेर से जोड़कर देख रहे हैं।

“SIR के नाम पर 58 लाख वोट हटाए जा रहे” — ममता

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि

“SIR के नाम पर बंगाल में करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।”

उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया में

कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित किया जा रहा है,

गरीब, प्रवासी और अल्पसंख्यक मतदाताओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

राजनीतिक साजिश का आरोप

पिछले करीब 15 वर्षों से बंगाल की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए रखने वाली ममता बनर्जी ने बीजेपी को राज्य में सत्ता से दूर रखा है। TMC समर्थकों का कहना है कि “जब चुनाव में ममता को हराना संभव नहीं हुआ, तो अब मतदाता सूची के जरिए चुनावी गणित बदलने की कोशिश की जा रही है।”

लोकतंत्र बनाम व्यवस्था की लड़ाई?

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई यह तय करेगी कि

SIR प्रक्रिया वास्तव में प्रशासनिक सुधार है
या

लोकतांत्रिक अधिकारों में दखल देने का जरिया

बुधवार की सुनवाई न सिर्फ बंगाल, बल्कि देश की चुनावी प्रक्रिया के भविष्य के लिए भी अहम मानी जा रही है

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VIKAS TRIPATHI
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