देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर को लेकर हालात बेहद चिंताजनक होते जा रहे हैं। कई राज्यों से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो आम लोगों की परेशानी और व्यवस्था की बदहाली को साफ दिखाती हैं। कहीं गैस सिलेंडर पाने के लिए तीन से चार किलोमीटर लंबी लाइनें लग रही हैं, तो कहीं लोग सिलेंडर के लिए आपस में भिड़ रहे हैं। कई जगहों पर कालाबाजारी भी चरम पर है, जहां 900 रुपये में मिलने वाला घरेलू सिलेंडर 3 से 5 हजार रुपये तक में बेचा जा रहा है।
लोग सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लाइन में लग जा रहे हैं और कई बार शाम तक भी उनका नंबर नहीं आता। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि एजेंसी के पास सिलेंडर से भरा ट्रक आते ही लोग उसके पीछे दौड़ पड़ते हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्होंने सबको चौंका दिया है।
बाराबंकी में लाइन को लेकर जमकर मारपीट
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में गैस सिलेंडर लेने के लिए लगी लाइन में आगे-पीछे होने को लेकर दो युवकों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। बंकी स्थित अमित गैस एजेंसी के बाहर सिलेंडर लेने पहुंचे अब्दुल और मनीष कुमार के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लात-घूंसे बरसाने शुरू कर दिए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
बस्ती में सिलेंडर के लिए ‘मैराथन दौड़’
इसी तरह बस्ती जिले में गैस सिलेंडर का स्टॉक आने की खबर मिलते ही लोग एजेंसी की ओर दौड़ पड़े। बनकटी ब्लॉक के महादेवा चौराहे स्थित महागौरी गैस एजेंसी के बाहर लोगों ने कंधों पर सिलेंडर उठाकर ऐसी दौड़ लगाई, मानो कोई मैराथन प्रतियोगिता चल रही हो। हर कोई चाहता था कि वह किसी तरह पहले नंबर पर पहुंचकर सिलेंडर हासिल कर ले।
कानपुर में महिला बोली – अब तो सुसाइड करने का मन करता है
कानपुर की एक महिला की पीड़ा भी सामने आई है। महिला का कहना है कि उसके घर में एक भी भरा सिलेंडर नहीं बचा है और पिछले आठ दिनों से वह एजेंसी के चक्कर काट रही है। रोजाना एजेंसी तक आने-जाने में करीब 200 रुपये खर्च हो जाते हैं और आठ दिन में 1600 रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिला। महिला ने दुखी होकर कहा कि इतनी परेशानी के बाद तो अब आत्महत्या करने का मन करने लगता है।
पंजाब में लाइन में लगे बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत
पंजाब के बरनाला जिले के शैहना गांव में सिलेंडर लेने के लिए लगी लंबी लाइन में खड़े एक बुजुर्ग की हार्ट अटैक से मौत हो गई। 60 वर्षीय भूषण कुमार मित्तल सुबह करीब आठ बजे से गैस एजेंसी के बाहर लाइन में खड़े थे और उनका नंबर 25वां था। करीब दो घंटे तक इंतजार करने के बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन उनकी वहीं मौत हो गई।
इसी बीच लुधियाना के शांति नगर इलाके में सिलेंडर लेकर घर जा रहे एक व्यक्ति से बाइक सवार दो युवकों ने सिलेंडर छीन लिया और फरार हो गए।
बिहार में डिप्टी CM के नाम पर उठा ले गए सिलेंडर
बिहार की राजधानी पटना में भी एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। गर्दनीबाग स्थित सत्या गैस एजेंसी पर कुछ लोग पहुंचे और खुद को एसडीओ बताते हुए कहा कि वे डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के यहां से आए हैं। उन्होंने 15 सिलेंडर की मांग की, लेकिन गोदाम में उस समय केवल चार भरे सिलेंडर मौजूद थे। आरोप है कि वे चारों सिलेंडर लेकर चले गए। बाद में डिप्टी सीएम कार्यालय ने इस दावे को पूरी तरह बेबुनियाद और भ्रामक बताया और मामले की जांच के आदेश दिए।
झारखंड में पेट्रोल स्टॉक करते समय युवक जिंदा जला
झारखंड के गढ़वा जिले में गैस संकट के बीच एक दर्दनाक हादसा भी सामने आया। शंभू प्रसाद गुप्ता नाम का युवक पेट्रोल का स्टॉक कर रहा था। परिजनों के मुताबिक उसे डर था कि गैस की तरह कहीं पेट्रोल-डीजल भी मिलना बंद न हो जाए। गुरुवार को वह गैलन में पेट्रोल लेकर बाइक से जा रहा था, तभी एक तेज रफ्तार कार ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी। गिरते ही गैलन में आग लग गई और शंभू आग की चपेट में आ गया। इस हादसे में उसकी जिंदा जलकर मौत हो गई।
कालाबाजारी से बढ़ी परेशानी
गैस की कमी के बीच कालाबाजारी ने हालात और खराब कर दिए हैं। कई जगहों पर घरेलू सिलेंडर 900 रुपये की जगह 3 हजार से 5 हजार रुपये तक में बेचा जा रहा है। ऐसे में आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
कुल मिलाकर देश के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर को लेकर हालात ऐसे बन गए हैं कि लोग इसे ‘सोना-चांदी’ से कम नहीं समझ रहे। लंबी लाइनों, मारपीट, लूट और हादसों की खबरें इस संकट की गंभीरता को साफ दिखा रही हैं।














