Iमध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। डोनाल्ड ट्रंप ने ‘पूरी सभ्यता को तबाह’ करने की अपनी घोषित समयसीमा से कुछ घंटे पहले ही ईरान के साथ दो हफ्तों के सीजफायर (युद्धविराम) का ऐलान कर दिया है।
ट्रंप ने यह घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर की। खास बात यह है कि यह फैसला रात 8 बजे तय डेडलाइन से महज दो घंटे पहले लिया गया, जिससे संभावित बड़े सैन्य टकराव को फिलहाल टाल दिया गया है।
पाकिस्तान के अनुरोध पर बनी सहमति
सूत्रों के मुताबिक, यह सीजफायर शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के अनुरोध के बाद संभव हो सका। इस कदम को क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की शर्त
सीजफायर की सबसे अहम शर्त ईरान द्वारा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को तुरंत, पूरी तरह और सुरक्षित रूप से खोलना है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान इस शर्त का पालन नहीं करता, तो उसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर तेज सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इजराइल भी सीजफायर में शामिल
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल भी इस दो हफ्ते के सीजफायर का हिस्सा है और बातचीत जारी रहने तक अपनी बमबारी रोकने पर सहमत हो गया है। इससे क्षेत्र में तत्काल तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव बना आधार
ट्रंप ने बताया कि ईरान की ओर से 10-सूत्रीय प्रस्ताव दिया गया है, जिसे बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार माना गया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका अपने अधिकांश सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और अब एक दीर्घकालिक शांति समझौते के करीब पहुंच गया है।
— Secretary Marco Rubio (@SecRubio) April 7, 2026
ईरान का दावा—अमेरिका झुका
वहीं, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का कहना है कि अमेरिका को उनके प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। प्रस्ताव में हमले न करने की प्रतिबद्धता, होर्मुज पर नियंत्रण, यूरेनियम संवर्धन की स्वीकृति, प्रतिबंधों को हटाने और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं।
दो हफ्तों में तय होगा भविष्य
यह दो हफ्तों का सीजफायर एक तरह से ‘विंडो पीरियड’ है, जिसमें दोनों पक्ष स्थायी शांति समझौते की दिशा में बातचीत को अंतिम रूप देने की कोशिश करेंगे।
फिलहाल, इस अचानक हुए फैसले से संभावित बड़े युद्ध का खतरा टलता नजर आ रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह अस्थायी राहत स्थायी शांति में बदलती है या नहीं।














