Saturday, January 31, 2026
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Jaya Ekadashi 2026: पिशाच योनि से मुक्ति और मोक्ष का द्वार खोलने वाली पुण्यदायी एकादशी, जानिए व्रत कथा और पूजा विधि

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। माघ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा, व्रत और कथा पाठ करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेष बात यह है कि जया एकादशी की कथा का श्रवण या पाठ मात्र से ही भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है।

कब है जया एकादशी 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष जया एकादशी का व्रत 29 जनवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि को किया जाएगा।

जया एकादशी का धार्मिक महत्व

धर्मशास्त्रों में जया एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि मृत्यु के बाद दुर्गति का भय भी समाप्त हो जाता है। कहा जाता है कि जो श्रद्धालु इस दिन पूरी निष्ठा से व्रत रखते हैं, उन्हें भूत-प्रेत या पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है। यह व्रत विशेष रूप से भय, मानसिक कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा से पीड़ित लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है।

जया एकादशी की पौराणिक व्रत कथा

पद्म पुराण के अनुसार, एक बार देवराज इंद्र की सभा में गंधर्वों का उत्सव चल रहा था। उसी समय गंधर्व माल्यवान और गंधर्व कन्या पुष्पवती नृत्य-गान प्रस्तुत कर रहे थे। प्रस्तुति के दौरान दोनों एक-दूसरे पर मोहित हो गए, जिससे उनका सुर-ताल बिगड़ गया। इस अनुशासनहीनता से क्रोधित होकर इंद्र देव ने दोनों को श्राप दे दिया कि वे स्वर्ग से च्युत होकर मृत्युलोक में पिशाच योनि में जन्म लेंगे।

श्राप के प्रभाव से दोनों हिमालय की तराई में पिशाच बनकर रहने लगे। वहां उन्हें न तो भोजन मिलता था और न ही नींद। भूख, ठंड और कष्टों से पीड़ित होकर वे अपने किए पर पश्चाताप करने लगे। माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन अत्यधिक पीड़ा के कारण वे कुछ भी भोजन नहीं कर सके और केवल फलाहार करके दिन व्यतीत किया।

कड़ाके की ठंड के कारण वे रातभर सो नहीं पाए और इस प्रकार अनजाने में ही जया एकादशी का जागरण हो गया। बिना विधि जाने भी उन्होंने पूरी श्रद्धा से एकादशी व्रत पूर्ण कर लिया। भगवान विष्णु उनके तप और भक्ति से प्रसन्न हुए। अगले ही दिन दोनों का पिशाच शरीर नष्ट हो गया और वे पुनः अपने दिव्य गंधर्व स्वरूप में लौट आए। आकाश से पुष्प वर्षा हुई और वे स्वर्गलोक को प्रस्थान कर गए।

जया एकादशी पर पूजा विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगाजल मिले जल से स्नान करें

भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें

पीले फूल, अक्षत, फल और तुलसी दल अर्पित करें

धूप-दीप जलाकर जया एकादशी की कथा का पाठ करें

ॐ जय जगदीश हरे’ की आरती करें

सात्विक भोजन करें और चावल का सेवन न करें

घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार

मान्यता है कि जया एकादशी का व्रत रखने से मन को शांति मिलती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। यह एकादशी जीवन के भय, दुख और बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है।

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