भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर सैन्य हमला करने से महज कुछ मिनट दूर रह गई थी। हालांकि अंतिम समय में पाकिस्तान की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध आने के बाद यह हमला टाल दिया गया।
मुंबई में आयोजित नौसेना अलंकरण समारोह (Naval Investiture Ceremony) के दौरान बोलते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि इस ऑपरेशन ने भारतीय नौसेना की तत्परता और आक्रामक रणनीतिक क्षमता को दुनिया के सामने दिखाया। इस समारोह में ऑपरेशन के दौरान उत्कृष्ट सेवा देने वाले दो वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों को युद्ध सेवा पदक से सम्मानित भी किया गया।
पाकिस्तान ने मांगा था सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि यह अब कोई रहस्य नहीं है कि भारतीय नौसेना ने समुद्री मोर्चे पर पूरी तैयारी कर ली थी और हमला शुरू होने से केवल कुछ मिनट दूर थी। उसी समय पाकिस्तान की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध आया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि भारतीय नौसेना किसी भी परिस्थिति में तेज़ी से तैनाती कर देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव, 1900 जहाज फंसे
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
उन्होंने बताया कि इस तनावपूर्ण माहौल के चलते करीब 1,900 व्यापारिक जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं और दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही पर भारी असर पड़ा है।
जंग शुरू होने से पहले इस मार्ग से रोजाना करीब 130 जहाज गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर महज 6–7 जहाज प्रतिदिन रह गई है।
समुद्र अब रणनीतिक युद्धक्षेत्र बन चुके हैं
नौसेना प्रमुख ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में समुद्र अब केवल व्यापारिक मार्ग नहीं रहे, बल्कि वे रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन और संघर्ष के प्रमुख मंच बनते जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि तेजी से विकसित हो रही तकनीक और नई सैन्य रणनीतियों ने युद्ध की योजना, संचालन और उससे निपटने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे सुरक्षा चुनौतियां और अधिक जटिल हो गई हैं।
नौसेना में तेजी से बढ़ रही ताकत
एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय नौसेना अपनी क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रही है और सिर्फ एक वर्ष में 12 नए युद्धपोत और पनडुब्बियां नौसेना में शामिल की गई हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।














