Thursday, January 15, 2026
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सोना-चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर: जनवरी के दो हफ्तों में ऐतिहासिक तेजी, निवेशक करें मुनाफावसूली या खरीदारी? एक्सपर्ट्स की बड़ी सलाह

सोना और चांदी इन दिनों ऐसी ऐतिहासिक तेजी पर हैं कि निवेशकों की नजरें इन पर टिकी हुई हैं। जनवरी 2026 के सिर्फ पहले दो हफ्तों में ही दोनों कीमती धातुओं ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना करीब 1.40 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच चुका है, जबकि चांदी ने 2.60 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा पार कर लिया है।

इस तेज रफ्तार उछाल ने निवेशकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या अब मुनाफा बुक कर निकल जाना चाहिए या आगे और तेजी का इंतजार किया जाए? वहीं नए निवेशक इस दुविधा में हैं कि इतनी ऊंची कीमतों पर खरीदारी करना सही फैसला होगा या नहीं।


इतनी जबरदस्त तेजी की वजह क्या है?

कमोडिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस उछाल की सबसे बड़ी वजह वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव है।

अमेरिका, ईरान, वेनेजुएला, चीन और जापान से जुड़े घटनाक्रमों ने वैश्विक बाजार में डर का माहौल बना दिया है।

जब भी दुनिया में तनाव बढ़ता है, निवेशक शेयर बाजार और जोखिम भरे एसेट्स से पैसा निकालकर सेफ हेवन माने जाने वाले सोने-चांदी की ओर रुख करते हैं।

इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर उठे सवालों ने डॉलर और बॉन्ड मार्केट में अस्थिरता पैदा की है, जिसका सीधा फायदा कीमती धातुओं को मिल रहा है।


क्या 2026 में भी जारी रहेगी तेजी?

बड़े ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 पूरी तरह स्थिर नहीं रहने वाला है। यह साल उतार-चढ़ाव, नीतिगत बदलावों और वैश्विक तनावों से भरा हो सकता है। ऐसे माहौल में सोना और चांदी निवेशकों के पोर्टफोलियो में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि—

दुनिया भर के सेंट्रल बैंक लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं।

खदानों से सोने-चांदी की सप्लाई सीमित बनी हुई है।

पुराने सोने (री-साइक्लिंग) की बिक्री में भी कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं दिख रही।

इन सभी कारणों से लंबी अवधि में सोना और चांदी मजबूत निवेश विकल्प बने रह सकते हैं।


अब निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए?

ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के कमोडिटी एक्सपर्ट मनीष शर्मा मानते हैं कि फिलहाल वैश्विक तनाव कम होने के कोई ठोस संकेत नहीं हैं। ऐसे में निकट भविष्य में सोने और चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।

मौजूदा निवेशकों के लिए सलाह

पूरी होल्डिंग बेचने के बजाय 40–50% तक मुनाफा बुक करना समझदारी हो सकती है।

इससे अब तक का फायदा सुरक्षित हो जाएगा और आगे की संभावित तेजी में हिस्सेदारी भी बनी रहेगी।

नए निवेशकों के लिए सलाह

एक साथ बड़ी रकम निवेश करने से बचें।

SIP या चरणबद्ध निवेश (छोटे-छोटे हिस्सों में खरीद) बेहतर रणनीति हो सकती है।

इससे कीमतों में अचानक गिरावट का जोखिम कम होगा।

सोना और चांदी इस समय रिकॉर्ड ऊंचाई पर जरूर हैं, लेकिन यह तेजी डर, अनिश्चितता और वैश्विक अस्थिरता की देन है। जब तक दुनिया में तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक इन कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ने की संभावना कम ही दिखती है।
हालांकि, निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि संतुलित रणनीति के साथ निवेश या मुनाफावसूली का फैसला करें।

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