नई दिल्ली। दिल्ली की राजनीति में आबकारी नीति मामले को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने केजरीवाल के भावुक होने को “नौटंकी” बताते हुए कहा कि अदालत से बरी होने के बाद जश्न मनाने के बजाय उन्हें जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।
यह बयान उस समय आया है जब दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित आबकारी नीति (शराब नीति) मामले में अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 23 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिससे मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा।
क्या बोले कपिल मिश्रा?
कपिल मिश्रा ने कहा कि जब अरविंद केजरीवाल सत्ता में थे, तब भी वे “नौटंकी” करते थे और अब अदालत से राहत मिलने के बाद भी वही रवैया दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनता उन्हें पहले ही नकार चुकी है और अब उन्हें गंभीर सवालों के जवाब देने चाहिए।
मिश्रा ने केजरीवाल से कई सीधे सवाल पूछे:
अगर शराब नीति पूरी तरह सही थी और उसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ, तो आरोप लगते ही नीति वापस क्यों ली गई?
कमीशन 6% से बढ़ाकर 12% क्यों किया गया?
“एक बोतल के साथ एक बोतल फ्री” जैसी योजना क्यों लाई गई?
इससे सरकार के राजस्व पर क्या असर पड़ा और क्या घाटा हुआ?
उन्होंने कहा कि यदि केजरीवाल खुद को ईमानदार बताते हैं, तो उन्हें इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला
मंत्री कपिल मिश्रा ने यह भी कहा कि केजरीवाल को “इतनी खुशी नहीं मनानी चाहिए”, क्योंकि मामला अब हाईकोर्ट पहुंच चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि इस केस को लेकर पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां भी चर्चा में रही हैं।
उनका कहना था कि कानून अपना काम करेगा और अंतिम निर्णय उच्च न्यायालय में होगा। इसलिए राजनीतिक उत्सव मनाने के बजाय कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किया जाना चाहिए।
अदालत का फैसला और राजनीतिक प्रतिक्रिया
राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के बाद अरविंद केजरीवाल भावुक नजर आए थे। उनके साथ मनीष सिसोदिया भी मौजूद थे। यह मामला लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना हुआ था और इसमें केजरीवाल तथा सिसोदिया को महीनों जेल में भी रहना पड़ा था।
अदालत से बरी होने के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे “सत्य की जीत” बताया, जबकि विपक्षी दलों ने फैसले पर सवाल उठाए और इसे कानूनी लड़ाई का एक पड़ाव बताया।
राजनीतिक असर
आबकारी नीति विवाद ने दिल्ली की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक साजिश बताती रही है, वहीं विपक्ष इसे कथित भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताता रहा है।
अब जबकि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, आने वाले दिनों में यह मुद्दा दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।
आगे क्या?
हाईकोर्ट में सीबीआई की अपील पर सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि हाईकोर्ट निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखता है तो आम आदमी पार्टी को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं यदि आदेश में बदलाव होता है तो कानूनी जटिलताएं फिर बढ़ सकती हैं।
फिलहाल, राजनीतिक बयानबाजी तेज है और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। दिल्ली की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब हाईकोर्ट की आगामी कार्यवाही पर टिकी है।
आबकारी नीति मामले में निचली अदालत से मिली राहत के बावजूद विवाद थमा नहीं है। मंत्री कपिल मिश्रा के तीखे बयान ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। अब यह देखना होगा कि हाईकोर्ट में इस मामले की दिशा क्या तय होती है और इसका दिल्ली की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।














