Saturday, January 31, 2026
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राजघाट में गूंजी आत्मा की ध्वनि रेखा मल्होत्रा द्वारा आयोजित ‘अनहद नाद एनर्जी सर्कल’ ने बिखेरी दिव्यता, शांति और आत्म-जागरण की तरंगें

नई दिल्ली: शांति, सत्य और आध्यात्मिक चेतना की प्रतीक पवित्र भूमि राजघाट, नई दिल्ली में रविवार को एक अलौकिक और अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव का साक्षी बना। नोएडा निवासी ग्लोबल हीलर, एनर्जी अल्केमिस्ट और आत्मा-मार्गदर्शक रेखा मल्होत्रा द्वारा आयोजित ‘अनहद नाद एनर्जी सर्कल’ ने पूरे वातावरण को दिव्यता, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।

यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि आत्मा को छू लेने वाला आध्यात्मिक अनुभव था, जहां ध्वनि, मौन और ऊर्जा ने मिलकर उपस्थित लोगों के अंतर्मन को झकझोर दिया। मंत्रोच्चार, भजन, ध्यान और गहन मौन के माध्यम से हर हृदय को शांति, संतुलन और आत्म-जागरण का अनुभव कराया गया।

अनहद नाद : आत्मा से निकलने वाली दिव्य ध्वनि

रेखा मल्होत्रा ने बताया कि अनहद नाद वह दिव्य ध्वनि है जो किसी वाद्य यंत्र से उत्पन्न नहीं होती, बल्कि अंतरिक्ष, चेतना और आत्मा से प्रकट होती है। जब यह अनहद नाद राजघाट की पवित्रता में गूंजा, तो उपस्थित साधक गहरे भावनात्मक अनुभव में डूब गए। कई लोगों की आंखों से आंसू बह निकले, क्योंकि यह ध्वनि सीधे हृदय और आत्मा को स्पर्श कर रही थी।

उन्होंने कहा कि यह कोई मंचीय प्रदर्शन नहीं था, बल्कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और मानसिक अशांति के लिए एक आध्यात्मिक औषधि थी—जहां ध्वनि समाधान बन गई और मौन मार्गदर्शन

समृद्धि, संतुलन और आत्म-जागरण की यात्रा

‘अनहद नाद एनर्जी सर्कल’ का उद्देश्य केवल ध्यान कराना नहीं, बल्कि लोगों को आंतरिक संतुलन, मानसिक शांति, भावनात्मक उपचार और आत्मिक जागृति की ओर ले जाना था। इस सत्र के दौरान प्रतिभागियों ने स्वयं को हल्का, शांत और ऊर्जावान महसूस किया।

रेखा मल्होत्रा ने कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर की ध्वनि को सुनना सीख लेता है, तब जीवन स्वयं संतुलित होने लगता है। अनहद नाद उसी भीतरी यात्रा का द्वार खोलता है, जहां आत्मा स्वयं से संवाद करती है।

राजघाट की पवित्रता में और गहराया अनुभव

महात्मा गांधी की समाधि स्थल राजघाट की शांत, सात्विक और ऊर्जावान भूमि ने इस आयोजन को और भी प्रभावशाली बना दिया। उपस्थित लोगों ने अनुभव किया कि जैसे यह पवित्र स्थल स्वयं इस आध्यात्मिक साधना का साक्षी बनकर ऊर्जा का प्रवाह बढ़ा रहा हो।

कार्यक्रम का समापन शांति, कृतज्ञता और आत्मिक संतुलन के भाव के साथ हुआ। प्रतिभागियों ने इसे अपने जीवन के सबसे गहन और यादगार आध्यात्मिक अनुभवों में से एक बताया।

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