बारामती: महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बारामती विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला किया है, जिसके बाद उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत लगभग तय मानी जा रही है। यह फैसला महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अनुरोध के बाद लिया गया।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गुरुवार दोपहर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की कि पार्टी ने बारामती विधानसभा उपचुनाव से अपना उम्मीदवार वापस लेने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही कांग्रेस के उम्मीदवार आकाश मोरे ने भी अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है। इस निर्णय के बाद उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया है।
दरअसल, पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद चुनाव आयोग ने बारामती विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा की थी। इस सीट से सुनेत्रा पवार ने नामांकन दाखिल किया था, जबकि कांग्रेस ने भी पहले अपना उम्मीदवार मैदान में उतारा था। लेकिन अब कांग्रेस के कदम से चुनावी मुकाबले की स्थिति खत्म हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अहम भूमिका बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, फडणवीस ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल को फोन कर सुनेत्रा पवार के निर्विरोध निर्वाचन के लिए कांग्रेस से अपना उम्मीदवार वापस लेने का अनुरोध किया था। इसके बाद कांग्रेस ने राजनीतिक सद्भावना दिखाते हुए यह निर्णय लिया।
कांग्रेस के इस फैसले का सुनील तटकरे ने स्वागत किया है। एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने कांग्रेस को धन्यवाद देते हुए इसे राजनीतिक एकता और उदारता का प्रतीक बताया।
तटकरे ने कहा कि बारामती में उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी, लेकिन कांग्रेस ने महानता दिखाते हुए अपना आवेदन वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर वह कांग्रेस नेतृत्व के इस निर्णय के लिए आभार व्यक्त करते हैं।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अजित पवार ने वर्ष 1991 और 1992 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था और बाद में भी लंबे समय तक कांग्रेस के साथ मिलकर राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाई। 1999 से 2014 तक जब महाराष्ट्र में गठबंधन की सरकार थी, तब उन्होंने मंत्री और उपमुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले थे।
तटकरे ने यह भी कहा कि वरिष्ठ नेता शरद पवार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। उनका मानना है कि लोकतंत्र में हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है, लेकिन इस बार राजनीतिक सहमति के चलते अलग परिस्थिति बनी है।
उन्होंने आगे बताया कि उन्होंने और Praful Patel ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से संपर्क कर इस मुद्दे पर चर्चा की थी, जिसके बाद कांग्रेस ने अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का फैसला लिया।
गौरतलब है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने पहले भाजपा के साथ सत्ता में शामिल होने को लेकर एनसीपी की आलोचना भी की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तटकरे ने कहा कि एनसीपी खुलकर National Democratic Alliance के साथ है और अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट रूप से स्वीकार करती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बारामती उपचुनाव में कांग्रेस का यह कदम महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों और राजनीतिक शिष्टाचार का संकेत माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि सुनेत्रा पवार के निर्विरोध निर्वाचन के बाद बारामती और राज्य की राजनीति में आगे क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।














