Friday, March 20, 2026
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CEC नियुक्ति कानून पर सुनवाई से CJI सूर्यकांत अलग, ‘हितों के टकराव’ से बचने के लिए लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े नए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने यह कदम संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) के आरोपों से बचने के लिए उठाया।

क्यों अलग हुए CJI?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि यदि वे इस मामले की सुनवाई करते हैं, तो उन पर हितों के टकराव का आरोप लगाया जा सकता है। यही कारण है कि उन्होंने निष्पक्षता बनाए रखने के लिए खुद को इस केस से अलग कर लिया।

नया कानून और विवाद

यह मामला उस कानून से जुड़ा है, जिसे संसद ने दिसंबर 2023 में पारित किया था। इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए बनाए गए चयन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया गया है।
इस बदलाव को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें नियुक्ति प्रक्रिया की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए गए हैं।

वकील प्रशांत भूषण का सुझाव

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुझाव दिया कि इस मामले को ऐसी बेंच के पास भेजा जाए, जिसमें शामिल जज भविष्य में CJI बनने की कतार में न हों। उनका तर्क था कि इससे किसी भी तरह के पक्षपात या विवाद की संभावना कम होगी।

किस बेंच को मिलेगा मामला?

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि वे मामले को ऐसी बेंच को सौंपेंगे, जिसके सदस्य CJI बनने की कतार में न हों, ताकि किसी भी प्रकार के आरोपों से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल 2026 के लिए तय की है और इसे नई बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला

यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद सामने आया है। उस फैसले में कोर्ट ने कहा था कि जब तक संसद कोई कानून नहीं बनाती, तब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक पैनल द्वारा की जाएगी, जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे।

कोर्ट का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हो, और उस पर कार्यपालिका का प्रभाव न पड़े।

CJI का यह फैसला न्यायिक पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें नई बेंच और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस महत्वपूर्ण संवैधानिक मुद्दे पर आगे की बहस होगी।

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VIKAS TRIPATHI
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