
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में बीजेपी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने अनुमति के बिना कलश यात्रा निकालकर न सिर्फ प्रशासन को चुनौती दी, बल्कि अपनी ही सरकार पर सवाल उठा दिए। मामला तब और दिलचस्प हो गया जब विधायक और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई और गुर्जर के कपड़े तक फट गए। अब सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश में अन्याय बढ़ गया है या फिर विधायक साहब की सत्ता में पूछ कम हो गई है?
विधायक बनाम पुलिस: धक्का-मुक्की और पिस्टल की धमकी?
गाजियाबाद के लोनी बॉर्डर पर जब विधायक नंद किशोर गुर्जर ने बिना अनुमति कलश यात्रा निकालने की जिद की, तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन फिर जो हुआ, वो कानून-व्यवस्था की किताब में नया अध्याय लिखने जैसा था—
🔹 बीजेपी विधायक के कपड़े फटे!
🔹 विधायक बोले— पुलिस ने पिस्टल तान दी!
🔹 शराब के नशे में धुत थे अफसर!
गुर्जर का कहना है कि अगर एसीपी और इंस्पेक्टर ने शराब नहीं पी थी, तो वे विधायक पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। अब ये बयान मजेदार है—क्या विधायक जी को अपनी ही सरकार के अफसरों पर भरोसा नहीं रहा?
“हमें मोदी जी से उम्मीद है, यूपी में अन्याय बहुत बढ़ गया है”
विधायक साहब का ये बयान अपने आप में ही व्यंग्य का शिखर है। जिस सरकार में विधायक हैं, उसी पर अन्याय का आरोप? यानी या तो सरकार खुद ही अपने नेताओं की नहीं सुन रही या फिर विधायक जी को अपनी पार्टी के मुख्यमंत्री से ज्यादा भरोसा प्रधानमंत्री पर है!
पुलिस की सफाई: न अनुमति थी, न आवेदन आया!
इस पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि—
🔹 20 मार्च को बिना अनुमति यात्रा निकालने की सूचना मिली।
🔹 रात में कई बार फोन किया गया, लेकिन जवाब नहीं मिला।
🔹 सुबह स्पष्ट कहा गया कि यात्रा गैर-कानूनी होगी, फिर भी निकाली गई।
यानि साफ है कि विधायक जी ने अपने ही कानून को चुनौती दी, और अब अन्याय की कहानी गढ़ रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या यूपी में कानून सिर्फ विपक्ष के लिए है, और बीजेपी विधायकों के लिए नहीं?
हजारों की भीड़ और रामचरित मानस
इस यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए। विधायक ने सिर पर रामचरित मानस रखकर यात्रा निकाली, मानो अब राजनीति का भी भगवाकरण हो गया है। सवाल ये है कि क्या धर्म की आड़ में नियम तोड़ना सही है? या फिर ये सिर्फ चुनावी मौसम की हलचल है?
तो सवाल ये है…
➡️ क्या बीजेपी विधायक की सत्ता में पूछ कम हो गई है?
➡️ क्या यूपी में बीजेपी सरकार के विधायक खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं?
➡️ क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है, और विधायक अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकते हैं?
अब देखना दिलचस्प होगा कि इस “अन्याय के खिलाफ उठी आवाज” पर खुद योगी सरकार क्या प्रतिक्रिया देती है—विधायक को न्याय मिलेगा या फिर अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाएगा?

VIKAS TRIPATHI
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