नई दिल्ली/हरियाणा। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर अपने आंदोलन को निर्णायक चरण में पहुंचाने का ऐलान किया है। संगठन लंबे समय से केंद्र सरकार की कथित किसान-विरोधी नीतियों तथा भारत–अमेरिका फ्री ट्रेड डील के संभावित प्रभावों के खिलाफ आवाज़ उठा रहा है। अब यूनियन ने चरणबद्ध कार्यक्रमों की घोषणा कर आंदोलन को व्यापक स्वरूप देने की तैयारी की है।
फ्री ट्रेड डील पर पारदर्शिता की मांग
यूनियन का कहना है कि भारत–अमेरिका फ्री ट्रेड डील को सार्वजनिक किया जाए और इसके प्रावधानों पर किसान संगठनों से चर्चा हो। संगठन का तर्क है कि यदि इस समझौते के कारण कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ता है, तो इससे देश के करोड़ों किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसानों की राय लेना आवश्यक है।
एमएसपी गारंटी कानून और कर्ज माफी
यूनियन की प्रमुख मांगों में सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी शामिल है, ताकि किसानों को उनकी उपज का सुनिश्चित और न्यायसंगत मूल्य मिल सके। इसके अलावा संपूर्ण कर्ज माफी की मांग भी दोहराई गई है। संगठन का कहना है कि बढ़ती लागत और घटती आमदनी के कारण किसान आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
बीज, बिजली और सामाजिक सुविधाओं पर राहत
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने बीज बिल और बिजली बिल में किसानों तथा आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की है। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर भी संगठन ने स्पष्ट रुख अपनाया है। उनका कहना है कि किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों को मुफ्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
आंदोलन के तीन बड़े कार्यक्रम
संगठन ने आगामी दिनों में तीन प्रमुख कार्यक्रमों की घोषणा की है:
27 फरवरी 2026 को भारत–अमेरिका फ्री ट्रेड डील और किसान विरोधी नीतियों के विरोध में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump तथा भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया जाएगा।
10 मार्च 2026 को देश के सभी प्रांतों के प्रत्येक जिले में व्यापक स्तर पर ट्रैक्टर मार्च निकाला जाएगा, जिसके माध्यम से किसानों की एकजुटता का प्रदर्शन किया जाएगा।
23 मार्च 2026 को हरियाणा के Kurukshetra जिले के पीपली में एक विशाल महापंचायत आयोजित की जाएगी। इसमें प्रदेश और देशभर से किसान, मजदूर एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। इसी मंच से आगे की आंदोलन की रणनीति घोषित की जाएगी।
व्यापक समर्थन की अपील
यूनियन ने किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और आम नागरिकों से इन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। साथ ही मीडिया से भी अनुरोध किया गया है कि वे 27 फरवरी, 10 मार्च और 23 मार्च को आयोजित कार्यक्रमों में पहुंचकर आंदोलन की वास्तविक स्थिति को जन-जन तक पहुंचाएं।
संगठन का दावा है कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा। आने वाले दिनों में इन कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों की मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम किया जाएगा।














