ढाका: बांग्लादेश की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। Tarique Rahman के सत्ता संभालने के बाद लिए जा रहे लगातार फैसलों को देश में ‘नई शुरुआत’ के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह बदलाव खासतौर पर उस दौर के बाद आया है जब Muhammad Yunus के कार्यकाल में कई नीतिगत फैसलों और कूटनीतिक तनावों को लेकर सवाल उठे थे।
भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई खटास, आंतरिक प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और सेना से लेकर न्यायिक प्रक्रियाओं तक में नए संकेत—इन सबने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नई उम्मीद
यूनुस के कार्यकाल में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते तनावपूर्ण दौर से गुजरे। संवाद कम हुआ और कई द्विपक्षीय मुद्दे लंबित रह गए। लेकिन नई सरकार बनने के बाद भारत की ओर से सकारात्मक संकेत मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी और भारतीय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उनके शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए।
ढाका स्थित भारतीय मिशन द्वारा वीजा सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से बहाल करने की घोषणा को भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फिलहाल मेडिकल और डबल-एंट्री वीजा जारी किए जा रहे हैं, जबकि सामान्य यात्रा वीजा जल्द शुरू होने की संभावना है। हालांकि गंगा जल बंटवारा, सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और व्यापार जैसे मुद्दों पर अभी लंबी प्रक्रिया बाकी है।

यूनुस काल के मामलों की समीक्षा
गृह मामलों के सलाहकार सलाहुद्दीन अहमद ने 5 अगस्त 2024 के बाद दर्ज मामलों की पुनः समीक्षा का आदेश दिया है। छात्र आंदोलन और अवामी लीग सरकार के पतन के बाद दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का कहना है कि भीड़ के दबाव या राजनीतिक प्रभाव में दर्ज मामलों को दोबारा परखा जाएगा ताकि निर्दोष लोगों को राहत मिल सके। पुलिस सुधार आयोग की सिफारिशों को लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई है।
सेना में बड़ा फेरबदल, शक्ति संतुलन बदला
सेना के शीर्ष पदों पर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। लेफ्टिनेंट जनरल एमडी मैनुर रहमान को नया चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) नियुक्त किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब नई सरकार प्रशासनिक और रणनीतिक नियंत्रण को पुनर्संतुलित करने की कोशिश कर रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से सेना प्रमुख वकार उज जमां की भूमिका पर असर पड़ सकता है, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया गया है।
शेख हसीना को राहत के संकेत?
पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT) में 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। लेकिन हाल ही में मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम को पद से हटाए जाने को राजनीतिक हलकों में हसीना के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।
साथ ही अवामी लीग की गतिविधियों के फिर से सक्रिय होने और कई जिलों में कार्यालय खुलने से राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।
यूनुस के करीबी अधिकारियों पर कार्रवाई
नई सरकार ने यूनुस के कार्यकाल से जुड़े कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू की है। नई दिल्ली में तैनात प्रेस मंत्री फैसल महमूद को कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही हटा दिया गया। वहीं ICT और दूरसंचार से जुड़े कुछ सलाहकारों के विदेश जाने की खबरें भी चर्चा में हैं।
अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का भरोसा
राष्ट्र को संबोधित करते हुए तारिक रहमान ने कहा कि बांग्लादेश में सभी धर्मों के लोगों—मुस्लिम, हिंदू, बौद्ध और ईसाई—को समान अधिकार और सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण बनाना है जहां किसी भी नागरिक को धार्मिक या राजनीतिक पहचान के आधार पर भेदभाव का सामना न करना पड़े।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की समीक्षा
बांग्लादेश सरकार ने अमेरिका के साथ हुए हालिया व्यापार समझौते की समीक्षा का निर्णय लिया है। वाणिज्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि समझौते में मौजूद एग्जिट क्लॉज का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
यह समझौता यूनुस के नेतृत्व में 9 फरवरी को हस्ताक्षरित हुआ था, लेकिन नई सरकार इसे राष्ट्रीय हितों के अनुरूप परखना चाहती है।

राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव
अवामी लीग पर पूर्व में लगाए गए प्रतिबंधों के बाद अब पार्टी कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ती दिख रही है। ढाका सहित कई क्षेत्रों में कार्यालय फिर से खुलने लगे हैं। इसे राजनीतिक पुनर्संतुलन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या यह ‘खेला’ का नया अध्याय है?
तारिक रहमान के त्वरित और रणनीतिक फैसलों ने बांग्लादेश की राजनीति में नई ऊर्जा और नई बहस को जन्म दिया है। जहां एक ओर इसे सुधार और संतुलन की दिशा में कदम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सत्ता समीकरणों के बड़े बदलाव का संकेत भी हो सकता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये फैसले भारत-बांग्लादेश संबंधों को स्थिर करेंगे, आंतरिक प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करेंगे और लोकतांत्रिक संस्थाओं में भरोसा बहाल कर पाएंगे—या फिर आने वाले समय में नई राजनीतिक चुनौतियां सामने आएंगी।














