Tuesday, February 17, 2026
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असम की सियासत में भूचाल: भूपेन बोरा के इस्तीफे पर सस्पेंस, CM सरमा से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल

असम में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष Bhupen Borah के इस्तीफे और उसे वापस लेने की अटकलों ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। वहीं असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के बयान और प्रस्तावित मुलाकात ने इस घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है।

इस्तीफे से मचा राजनीतिक हड़कंप

सोमवार को भूपेन बोरा के कांग्रेस से इस्तीफा देने की खबर ने पार्टी को झटका दिया। हालांकि शाम होते-होते यह दावा सामने आया कि पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने अपने फैसले पर पुनर्विचार का संकेत दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और वरिष्ठ नेता Rahul Gandhi ने उनसे बातचीत की, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा वापस लेने पर विचार किया।

लेकिन खुद बोरा का कहना है कि उन्होंने अंतिम फैसला लेने से पहले पार्टी नेतृत्व से समय मांगा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है और परिवार व शुभचिंतकों से सलाह के बाद ही अंतिम निर्णय लेंगे।

CM सरमा का बड़ा दावा

इसी बीच उत्तर प्रदेश के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मिर्जापुर में कहा कि उन्होंने भूपेन बोरा से फोन पर बात की है और उन्हें शाम 7 बजे घर बुलाया गया है। सरमा ने कहा,

“अगर उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया होता तो मुझे क्यों बुलाते? संभावना है कि वह बीजेपी में आएंगे।”

सरमा ने यहां तक कहा कि बीजेपी के दरवाजे बोरा के लिए खुले हैं और यदि वे पार्टी में शामिल होते हैं तो उन्हें “सेफ सीट” से चुनाव जिताने में मदद की जाएगी। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि बोरा कांग्रेस के भीतर “आखिरी हिंदू नेता” हैं।

कांग्रेस का पलटवार: ‘यह हमारा अंदरूनी मामला’

असम कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष Gaurav Gogoi, सांसद Pradyut Bordoloi और विधानसभा में विपक्ष के नेता Debabrata Saikia शामिल हैं, ने बोरा के घर पहुंचकर उन्हें मनाने की कोशिश की।

पार्टी के प्रदेश प्रभारी Jitendra Singh ने मीडिया से कहा, “यह हमारी पार्टी का अंदरूनी मामला है। हमने उन मुद्दों पर विस्तार से बात की है जिनसे वह परेशान थे और मैं उन्हें इस्तीफा वापस लेने के लिए धन्यवाद देता हूं।”

‘CM घर आएं तो गर्व की बात’

मुख्यमंत्री के घर आने के बयान पर भूपेन बोरा ने कहा,”अगर कोई मुख्यमंत्री मेरे घर आना चाहता है, तो यह बड़े गर्व की बात है।”

उन्होंने साथ ही हिमंत बिस्वा सरमा के कांग्रेस छोड़ने का जिक्र करते हुए कहा, “एक समय सरमा को भी पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि 58 विधायकों के समर्थन के बावजूद उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। क्या यह पार्टी की आंतरिक राजनीति है? ऐसी राजनीति कब तक चलेगी?”

32 साल का कांग्रेस सफर दांव पर

भूपेन बोरा करीब 32 वर्षों तक कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। वह बिहपुरिया से दो बार विधायक रह चुके हैं और 2021 से 2025 तक असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे। पिछले वर्ष उनकी जगह गौरव गोगोई ने जिम्मेदारी संभाली थी।

अब सवाल यह है कि क्या बोरा कांग्रेस में बने रहेंगे या बीजेपी का दामन थामेंगे? उनकी और मुख्यमंत्री सरमा की प्रस्तावित मुलाकात पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

असम की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

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