अखिलेश यादव ने Yogi Adityanath की सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए भ्रष्टाचार, वंदे मातरम् विवाद और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार विरोध सहन नहीं करती और लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने का काम कर रही है।
“इतनी झूठी सरकार कभी नहीं देखी”
सपा मुखिया ने कहा कि भाजपा सरकार केवल अपना ही राग अलापती है और विपक्ष की किसी भी आलोचना को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि “विकसित भारत-जी राम जी” जैसी योजनाओं का बजट घटाया जा रहा है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में झूठ और भ्रष्टाचार चरम पर है। उनके मुताबिक, गरीबों, पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है तथा नई योजनाओं के लिए आवंटित बजट में कटौती की जा रही है।
पानी की टंकियों में भ्रष्टाचार का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में बन रही पानी की टंकियां भ्रष्टाचार का भार नहीं सह पा रही हैं और इसी कारण टूट रही हैं। उनका कहना था कि निर्माण कार्यों में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हो रही हैं, जिसकी कीमत जनता को चुकानी पड़ रही है।
SIR और फॉर्म-7 को लेकर गंभीर आरोप
एसआईआर के मुद्दे पर सपा प्रमुख ने दावा किया कि मुसलमानों, पिछड़ों, दलितों, आदिवासियों और गरीब वर्ग के लोगों को फॉर्म-7 के जरिए नोटिस देकर उनके वोट कटवाए जा रहे हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।
अखिलेश ने कहा कि “Gen Z बहुत जागरूक है” और युवाओं ने सीएम का मतलब “corrupt mouth” तक निकाल दिया है। उनका कहना था कि जनता अब सरकार की कार्यशैली को समझ चुकी है।
वंदे मातरम् और JPNIC को लेकर विवाद
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी को “बिष्ट जी” संबोधित करते हुए कहा कि उनके “अन-रजिस्टर्ड संघी साथियों” ने कभी वंदे मातरम् नहीं गाया। उन्होंने आरोप लगाया कि न आजादी से पहले और न ही आजादी के बाद इन लोगों ने राष्ट्रगीत का सम्मान किया।
उन्होंने JPNIC (जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर) का जिक्र करते हुए कहा कि इसे बनाने वाला व्यक्ति अब भाजपा में शामिल हो चुका है। सपा प्रमुख ने भाजपा से मांग की कि “जिसने JPNIC बनाया, उसे अपनी पार्टी से निकालो।”
“लोकतंत्र खतरे में है”
सपा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश में लोकतंत्र खतरे में है और विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री का एक वीडियो भी साझा किया और लिखा, “झूठ बोलते समय ही चेहरे पर इतना तनाव होता है। सबको सांप सा क्यों सूंघ गया है? सच तो ये है कि न ये संतों का सम्मान करते हैं, न स्वतंत्रता सेनानियों का, न ही सज्जनों का।”
अखिलेश यादव के इन बयानों के बाद प्रदेश की सियासत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। भाजपा की ओर से अभी तक इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान तेज होने की संभावना है।














