लखनऊ/बलिया: बहुजन समाज पार्टी (BSP) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के आवास और अन्य ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी को लेकर सियासत तेज हो गई है। Mayawati ने कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अति-दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय” बताया है। वहीं, Dinesh Pratap Singh ने भी रेड के तरीके और समय पर सवाल उठाए हैं।
कई शहरों में एक साथ छापेमारी
बुधवार सुबह आयकर विभाग की टीम ने लखनऊ, बलिया और सोनभद्र समेत करीब दो दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। 50 से अधिक अधिकारियों की टीम ने वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की। सूत्रों के मुताबिक, विधायक की पत्नी और बेटे से जुड़ी कंपनियों की संपत्तियां भी जांच के दायरे में हैं।
उमाशंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक हैं और वर्तमान में BSP के इकलौते विधायक माने जाते हैं।
मायावती का बयान: ‘कोई शिकायत नहीं आई’
Bahujan Samaj Party सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि जबसे उमाशंकर सिंह पार्टी में आए हैं, उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं। उन्होंने दावा किया कि आज तक उनके क्षेत्र रसड़ा से अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने या किसी अन्य गलत कार्य की कोई शिकायत सामने नहीं आई है।
मायावती ने यह भी कहा कि विधायक पिछले लगभग दो वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। यदि आयकर विभाग को उनके खिलाफ कोई शिकायत मिली भी थी, तो उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्वस्थ होने के बाद पूछताछ की जा सकती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे विभागीय कार्य में हस्तक्षेप नहीं कर रहीं, लेकिन गंभीर बीमारी के दौरान इस तरह की कार्रवाई “मानवता के खिलाफ” है।
बी.एस.पी. के विधायक श्री उमाशंकर सिंह जबसे बी.एस.पी. में आये हैं उन्होंने पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अपनी ज़िम्मेवारी निभाई है और आजतक इनके क्षेत्र से इनके बारे में किसी भी प्रकार की अवैध तरीके़ से सम्पत्ति अर्जित करने या अन्य कोई भी ग़लत कार्य करने की शिकायत नहीं आई है।
हालाँकि…— Mayawati (@Mayawati) February 25, 2026
मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी जताई आपत्ति
योगी सरकार में मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, जो उमाशंकर सिंह के समधी भी हैं, ने सोशल मीडिया पर लिखा कि विधायक दो साल से अधिक समय से जीवन-मृत्यु के संघर्ष से गुजर रहे हैं। उनके अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में वे धनार्जन नहीं, बल्कि जीवन बचाने में समय और संसाधन खर्च कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस समय उनके आवास पर नर्स या डॉक्टर को भी प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। विधानसभा सत्र के दौरान भी वे शामिल नहीं हो सके। मंत्री ने सवाल उठाया कि ऐसे कठिन समय में इस प्रकार की कार्रवाई संवेदनहीनता दर्शाती है।
आगे क्या?
आयकर विभाग की ओर से फिलहाल आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। जांच एजेंसी वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन की पड़ताल कर रही है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और संभावित खुलासों पर सबकी नजर रहेगी।
यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें विपक्ष की प्रमुख नेता मायावती और सत्तारूढ़ दल के एक मंत्री—दोनों ने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए हैं।














