आम आदमी पार्टी (AAP) में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इसे “सामान्य संगठनात्मक फैसला” बताते हुए चड्ढा पर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने और महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप रहने के आरोप लगाए हैं।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टियों में इस तरह के बदलाव होते रहते हैं। उन्होंने कहा, “यह पार्टी का निर्णय है। संसद में नेता और उपनेता बदलना सामान्य प्रक्रिया है। ऐसे छोटे-छोटे फैसले समय-समय पर होते रहते हैं।”
पार्टी लाइन से अलग रुख पर उठे सवाल
AAP नेताओं का आरोप है कि राघव चड्ढा ने कई अहम मौकों पर पार्टी के रुख का समर्थन नहीं किया। चाहे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर का मुद्दा हो या संसद में एलपीजी संकट जैसे जनहित के मुद्दे उठाने का मौका—चड्ढा की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
पार्टी का कहना है कि चड्ढा ने लंबे समय से संसद में ऐसे मुद्दे नहीं उठाए, जिनमें केंद्र सरकार या भाजपा से सीधे सवाल किए गए हों। नेताओं के मुताबिक, यह पार्टी की विचारधारा और रणनीति के विपरीत है।
“हम केजरीवाल के सिपाही हैं”—संजय सिंह AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता Arvind Kejriwal से निडरता और संघर्ष का सबक सीखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश और जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर राघव चड्ढा ने न तो हस्ताक्षर किए और न ही खुलकर अपनी आवाज उठाई।
सौरभ भारद्वाज और आतिशी का भी हमला
दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष Saurabh Bharadwaj ने कहा कि जो भी नेता सरकार के खिलाफ गंभीर मुद्दे उठाता है, उसे दबाने की कोशिश की जाती है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी के अन्य नेता मुखर हैं। उन्होंने इशारों में चड्ढा की निष्क्रियता पर सवाल उठाए।
वहीं दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Atishi ने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र और संविधान पर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन ऐसे गंभीर मुद्दों पर भी राघव चड्ढा ने सवाल नहीं उठाए।
अनुराग ढांडा ने भी साधा निशाना
AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी Anurag Dhanda ने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में वोटिंग अधिकारों पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन चड्ढा इन मुद्दों पर भी चुप रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि वे देश के “असल मुद्दों” पर बोलने से बचते रहे हैं।
विपक्षी एकता और पार्टी व्हिप का मुद्दा
भगवंत मान ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद में कई बार विपक्षी दलों को एकमत होकर फैसले लेने होते हैं—जैसे वॉकआउट या विरोध प्रदर्शन। अगर कोई सांसद पार्टी व्हिप का पालन नहीं करता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होना स्वाभाविक है।
कुल मिलाकर, AAP के भीतर यह विवाद अब खुलकर सामने आ चुका है। पार्टी जहां इसे अनुशासन और संगठन का मामला बता रही है, वहीं राघव चड्ढा की चुप्पी और रुख को लेकर उठे सवाल आने वाले समय में राजनीतिक हलकों में और चर्चा का विषय बन सकते हैं।














