Monday, February 16, 2026
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“शिवाजी महाराज के नाम पर सियासत”: हर्षवर्धन सपकाल के बयान पर विवाद, बेटी गार्गी ने कहा—‘सत्य के पक्ष में एकजुट हों’

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर बयानबाजी को लेकर विवाद तेज हो गया है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के एक बयान को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है। इस बीच उनकी बेटी गार्गी सपकाल ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से अपने पिता का खुलकर समर्थन किया है और पूरे विवाद को “राजनीतिक साजिश” करार दिया है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद उस बयान से जुड़ा है, जिसमें हर्षवर्धन सपकाल ने कहा था कि शिवाजी महाराज का पराक्रम अद्वितीय है और उनके विचारों से प्रेरणा लेकर टीपू सुल्तान ने भी कार्य किया। उन्होंने यह भी कहा था कि शिवाजी महाराज की तरह टीपू सुल्तान ने भी किसी विषैली या विभाजनकारी सोच को बढ़ावा नहीं दिया।

बताया जा रहा है कि यह बयान एक प्रश्न के उत्तर में दिया गया था। कुछ संगठनों ने मांग की थी कि शासकीय कार्यालयों में महान व्यक्तित्वों के चित्र लगाए जाएं, जिनमें शिवाजी महाराज के साथ टीपू सुल्तान का चित्र भी शामिल हो। इसी संदर्भ में सपकाल ने अपनी बात रखी थी। हालांकि, विपक्ष ने इसे शिवाजी महाराज के अपमान से जोड़ते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी।

गार्गी सपकाल का भावनात्मक पोस्ट

लंदन स्थित एक महाविद्यालय में पब्लिक हेल्थ की पढ़ाई कर रहीं गार्गी सपकाल ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उनके पिता के बयान को जानबूझकर गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह विवाद शिवाजी महाराज के सम्मान के लिए नहीं, बल्कि उनके नाम का राजनीतिक दुरुपयोग कर विरोधियों को बदनाम करने का प्रयास है।

गार्गी ने लिखा,
“सत्य को पहचानें और सत्य के पक्ष में एकजुट होकर खड़े हों। सच्चे स्वराज्य के लिए साथ मिलकर संघर्ष करें।”

उनके अनुसार, शिवाजी महाराज के विचार समता, न्याय और लोककल्याण पर आधारित थे, और उनके पिता उन्हीं आदर्शों में विश्वास रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग वर्षों तक इतिहास को विकृत करते रहे, वही आज अचानक अपमान का दिखावा कर रहे हैं।

चयनात्मक नैतिकता पर सवाल

गार्गी सपकाल ने सत्ताधारियों पर चयनात्मक नैतिकता अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि जब भगत सिंह कोश्यारी द्वारा शिवाजी महाराज पर विवादित टिप्पणी की गई थी, तब सत्ता पक्ष मौन रहा। इसी तरह, इतिहासकार बाबासाहेब पुरंदरे द्वारा राजमाता जिजाऊ पर किए गए विवादित उल्लेखों पर भी कोई सख्त रुख नहीं अपनाया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग प्रतीकों के नाम पर समाज में द्वेष फैलाने का काम कर रहे हैं, जबकि स्वराज्य का असली अर्थ प्रेम, शांति, न्याय और जनता का सम्मान है—न कि हिंसा और उन्माद।

सोशल मीडिया पर नफरत का आरोप

गार्गी ने अपने पोस्ट में यह भी उल्लेख किया कि विवाद के बाद फर्जी आईडी बनाकर उन्हें अभद्र, स्त्रीद्वेषी और अपमानजनक संदेश भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने सच में शिवाजी महाराज के विचारों को समझा होता, तो ऐसा आचरण नहीं करता। उनके अनुसार, लगातार फैलाई जा रही नफरत का असर समाज में साफ दिखाई दे रहा है।

महापुरुषों के आदर्शों का हवाला

अपने पोस्ट में गार्गी ने ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहू महाराज, अहिल्याबाई होलकर और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरुषों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका सामाजिक न्याय और समता का विचार किसी भी भेदभावपूर्ण विचारधारा के विपरीत है। ऐसे में शिवजयंती से पहले माहौल को दूषित करना एक राजनीतिक साजिश प्रतीत होता है।

हर्षवर्धन सपकाल के बयान को लेकर छिड़ा विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर विपक्ष इसे शिवाजी महाराज के अपमान से जोड़ रहा है, तो दूसरी ओर गार्गी सपकाल इसे सुनियोजित राजनीतिक हमला बता रही हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है—क्या यह केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहेगा या महाराष्ट्र की सियासत में व्यापक असर डालेगा।

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VIKAS TRIPATHI
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