पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित ‘बाबरी मस्जिद’ निर्माण को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। बीजेपी नेता नवनीत राणा ने टीएमसी से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर को चेतावनी देते हुए कहा कि “जो लोग बाबरी बनाएंगे, उन्हें हिंदुस्तान में कब्र के लिए जगह नहीं मिलेगी।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।
बागेश्वर धाम से लौटकर तीखा हमला
मध्य प्रदेश में बागेश्वर धाम सरकार के प्रमुख पंडित धीरेंद्र शास्त्री से मुलाकात के बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में बोलते हुए नवनीत राणा ने कहा कि “संतों की माला के साथ हाथों में भाला होना भी जरूरी है।” उन्होंने खुद को “महाराष्ट्र की बेटी” बताते हुए कहा कि जो लोग पश्चिम बंगाल में बाबरी बनाने की बात कर रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि हिंदू समाज की ताकत क्या है।
राणा ने मंच से कहा, “तुम सिर्फ शुरुआत करो, हम वहां आकर बताएंगे कि हिंदू की ताकत क्या है।” उनके इस बयान को विपक्षी दलों ने भड़काऊ करार दिया है।
बाबरी मस्जिद बनाने वाले हुमायूँ कबीर तेरेको हिंदुस्तान में खुदकी कबर के लिए भी जगह नहीं मिलेगी । हम पुरे हिन्दू बंगाल में आकर बता देंगे हिन्दुओ की ताकत क्या हैं pic.twitter.com/xFU7KyzyEP
— Navnit Ravi Rana (@navneetravirana) February 16, 2026
मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ परियोजना पर विवाद
दरअसल, मुर्शिदाबाद के बेलडांगा क्षेत्र में हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद’ नाम से एक मस्जिद की नींव रखी थी। 11 फरवरी से निर्माण कार्य शुरू होने की बात सामने आई है। कबीर का दावा है कि यह ढांचा 11 एकड़ जमीन पर लगभग 50–55 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा, जहां एक साथ 12,000 लोग नमाज अदा कर सकेंगे।
इस परियोजना को उन्होंने अपनी नई पार्टी जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के बैनर तले शुरू किया है। इसके प्रचार के लिए ‘बाबरी यात्रा’ भी निकाली जा रही है, जिससे मामला और अधिक राजनीतिक रंग ले चुका है।
बीजेपी बनाम कबीर: आरोप-प्रत्यारोप
बीजेपी लगातार हुमायूं कबीर पर धार्मिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगा रही है, जबकि कबीर अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने कहा है कि मस्जिद का निर्माण हर हाल में पूरा होगा।
वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि नवनीत राणा का बयान सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस तरह के तीखे और उग्र बयानों से राज्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका रहती है।
बंगाल की राजनीति में धार्मिक ध्रुवीकरण
पश्चिम बंगाल में पहले से ही धार्मिक मुद्दों पर राजनीति गर्म रही है। ऐसे में ‘बाबरी मस्जिद’ नाम से प्रस्तावित निर्माण और उस पर आक्रामक राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आगामी चुनावी समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती हैं।
फिलहाल, मुर्शिदाबाद का यह मसला सिर्फ स्थानीय विवाद नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अडिग नजर आ रहे हैं।














