दिल्ली के साकेत स्थित A.P.J. स्कूल में कथित फीस बढ़ोतरी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि पिछले चार शैक्षणिक वर्षों (2021-22 से 2025-26) की बढ़ी हुई फीस जमा न करने के कारण कक्षा 10 के दो छात्रों को बोर्ड परीक्षा के एडमिट कार्ड (रोल नंबर) देने से इनकार कर दिया गया। जबकि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होनी हैं। परीक्षा से ठीक पहले सामने आए इस मामले ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।
सौरभ भारद्वाज का आरोप: “स्कूल की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं”
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि कुछ निजी स्कूल “गुंडागर्दी” पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि A.P.J. स्कूल ने बच्चों के रोल नंबर रोक दिए हैं और दिल्ली सरकार इस पर चुप है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों को तुरंत रोल नंबर जारी नहीं किए गए, तो वह सोमवार को स्वयं स्कूल पहुंचकर हर हाल में रोल नंबर दिलवाएंगे। भारद्वाज ने इसे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बताया और कहा कि बोर्ड परीक्षा जैसे संवेदनशील समय में ऐसी कार्रवाई अमानवीय है।
कल CBSE का Roll number लेकर आयेंगे
16.2.2026
1:00 बजे दोपहर
Apeejay School, Saketभाजपा सरकार और प्राइवेट स्कूल की गुंडागर्दी नहीं चलने देंगे
परसों CBSE की परीक्षा है और Apeejay School (Saket) ने बच्चों के Roll number रोक दिए हैं और बढ़ी हुई फीस देने के लिए पैरेंट्स को… pic.twitter.com/W2V5bX3zME
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) February 15, 2026
वीरेंद्र सचदेवा का पलटवार: “AAP शासनकाल की देन”
वहीं दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने AAP पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह मामला कोविड काल (2020) के दौरान हुई फीस वृद्धि से जुड़ा है और यह सब AAP सरकार के समय से चल रहा है।
सचदेवा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी अब इस मुद्दे को उठाकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश कर रही है मानो दिल्ली के सभी निजी स्कूलों में बोर्ड परीक्षार्थियों के रोल नंबर रोके जा रहे हों, जबकि ऐसा नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष भी इसी स्कूल में बोर्ड छात्रों के रोल नंबर रोके गए थे, जिन्हें केंद्रीय बाल आयोग के हस्तक्षेप के बाद जारी किया गया था।
“5 साल में क्या कार्रवाई की?” – बीजेपी का सवाल
बीजेपी अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि अगर फीस वृद्धि का मामला 2020 से लंबित है, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना ने बीते पांच वर्षों में क्या कार्रवाई की?
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली सरकार का नया शिक्षा कानून इतना सख्त है कि कोई भी निजी स्कूल बोर्ड परीक्षार्थियों के रोल नंबर नहीं रोक सकता। सचदेवा ने अभिभावकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सभी छात्र बोर्ड परीक्षा देंगे और उनके भविष्य के साथ कोई अन्याय नहीं होगा।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
बोर्ड परीक्षा जैसे अहम पड़ाव पर एडमिट कार्ड रोकने का मामला छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि फीस विवाद अपनी जगह है, लेकिन परीक्षा में बैठने का अधिकार बच्चों का है और इसे किसी भी परिस्थिति में बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
राजनीतिक घमासान के बीच समाधान की मांग
इस पूरे विवाद ने दिल्ली की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर AAP स्कूल प्रबंधन पर दबाव बना रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इसे AAP सरकार की नाकामी बता रही है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या छात्रों को समय रहते एडमिट कार्ड मिल पाएंगे और क्या यह मामला राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर प्रशासनिक समाधान तक पहुंचेगा।
बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले उठा यह विवाद न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि फीस वृद्धि जैसे मुद्दों पर स्पष्ट और पारदर्शी नीति की कितनी आवश्यकता है।














