तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में लंबे समय से चल रहे अवैध सरोगेसी और नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़े एक बड़े रैकेट का प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पर्दाफाश किया है। ED के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने इस मामले में आरोपी महिला डॉक्टर अथुलुरी नम्रथा उर्फ पचिपल्ली नम्रथा को 12 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने उन्हें 26 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
ED ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून PMLA, 2002 के तहत की है। जांच में सामने आया है कि आरोपी डॉक्टर निःसंतान दंपतियों को सरोगेसी के जरिए बच्चा दिलाने का झांसा देकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी कर रही थीं।
FIR के बाद ED की जांच में हुआ बड़ा खुलासा
ED की जांच हैदराबाद के गोपालापुरम पुलिस थाने में दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू हुई थी। इन FIR में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, अवैध सरोगेसी और बच्चों की तस्करी जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।
जांच के दौरान यह सामने आया कि डॉक्टर नम्रथा “यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर” के नाम से क्लिनिक चला रही थीं। यहां निःसंतान दंपतियों से मोटी रकम लेकर सरोगेसी प्रक्रिया का नाटक किया जाता था, जबकि वास्तविकता में नवजात बच्चों को गरीब और मजबूर परिवारों से खरीदा जाता था।
गरीब परिवारों से बच्चों का सौदा, दंपतियों से लाखों की वसूली
ED की जांच में खुलासा हुआ कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवारों, जो बच्चे को पालने में असमर्थ थे या गर्भपात कराना चाहते थे, उन्हें पैसों का लालच देकर बच्चा सौंपने के लिए तैयार किया जाता था।
इसके बाद इन नवजात बच्चों को निःसंतान दंपतियों को सौंप दिया जाता था।
लड़की के लिए करीब ₹3.5 लाख
लड़के के लिए ₹4.5 लाख तक वसूली जाती थी
दिखावे के लिए दंपतियों के गामेट्स लेकर सरोगेसी प्रक्रिया की फर्जी फाइल तैयार की जाती थी।
फर्जी दस्तावेज और अस्पतालों का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया कि सिकंदराबाद स्थित अस्पताल का लाइसेंस रद्द होने के बाद डिलीवरी विशाखापट्टनम के एक अस्पताल में कराई जाती थी।
नगर निगम को भेजी जाने वाली जन्म रिपोर्ट में असली जैविक माता-पिता की जगह निःसंतान दंपतियों का नाम दर्ज कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे, ताकि पूरे रैकेट पर किसी को शक न हो।
मनी लॉन्ड्रिंग और एजेंट नेटवर्क का खुलासा
बैंक खातों की जांच में पता चला कि दंपतियों से चेक और नकद में ली गई रकम को एजेंटों और सब-एजेंटों में कमीशन के तौर पर बांटा जाता था। शेष राशि गरीब जैविक माता-पिता तक पहुंचाई जाती थी। ED का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल था।
पहले भी हो चुकी थी गिरफ्तारी, अब फिर भेजी गई जेल
डॉ. नम्रथा को इससे पहले पुलिस ने गिरफ्तार किया था और 27 नवंबर 2025 को उन्हें जमानत मिल गई थी। हालांकि ED की पूछताछ के दौरान वह जांच में सहयोग नहीं कर रही थीं और सवालों से बचती रहीं।
सबूतों के आधार पर ED ने उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया और नामपल्ली स्थित एमएसजे कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 26 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
ED का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस अवैध सरोगेसी रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी उजागर हो सकती है। यह मामला न सिर्फ कानून के उल्लंघन का, बल्कि मानवता और नैतिकता से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े करता है।














