महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। विवाद की शुरुआत उस बयान से हुई जिसमें कोश्यारी ने कहा कि एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से “बहुत डरे हुए” हैं। इस बयान के बाद MNS नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
‘भगत सिंह नाम का अपमान’ – MNS का हमला
एमएनएस नेता संदीप देशपांडे ने कोश्यारी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि महान क्रांतिकारी भगत सिंह के नाम के साथ उनका नाम जुड़ा होना ही अपमान है। उन्होंने कहा, “यह भगत सिंह का अपमान है कि उनका नाम इनके साथ है। उन्हें अपना नाम बदल लेना चाहिए।” इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद की पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का मुंबई में आयोजित एक इंटरैक्टिव सेशन है। इस कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता सलमान खान, रणबीर कपूर और करण जौहर समेत कई जानी-मानी हस्तियां और कुछ आईएएस अधिकारी भी शामिल हुए थे।
राज ठाकरे ने आरोप लगाया था कि कई हस्तियां इस कार्यक्रम में “मोदी सरकार के डर” से शामिल हुईं। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कोश्यारी ने नासिक में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि लोग डर के कारण कार्यक्रम में आए थे, बल्कि “राज ठाकरे ही पीएम मोदी से बहुत डरे हुए हैं।”
‘मोदी से नहीं, गलत कामों से डरें’ – कोश्यारी
कोश्यारी ने अपने बयान में कहा, “भगवान राम की तरह मोदी के लिए सभी नागरिक एक समान हैं। मैं राज की इज्जत करता हूं, वह मेरे छोटे भाई जैसे हैं। उन्हें मोदी से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उनके करीब जाना चाहिए। उन्हें गलत कामों से डरना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा, “आप छत्रपति शिवाजी महाराज की धरती पर हैं,” जिससे उनके बयान को मराठा अस्मिता से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
शिवसेना (उद्धव) की भी एंट्री
इस विवाद पर संजय राउत ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोश्यारी को “ठाकरे परिवार को नहीं सिखाना चाहिए।” इससे साफ है कि यह मुद्दा अब व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है।
भाषा विवाद पर भी बयानबाज़ी
मुंबई में एक अन्य कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने भाषा विवाद पर कहा था कि “लोकल बीमारी” नहीं फैलनी चाहिए। इस पर राज ठाकरे ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि अपनी भाषा और राज्य से प्रेम करना बीमारी है, तो अधिकतर राज्य इससे प्रभावित हैं, लेकिन वे दूसरों को “उपदेश” नहीं देते।
राजनीतिक मायने
विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाज़ी आगामी राजनीतिक समीकरणों और महाराष्ट्र में बदलते राजनीतिक परिदृश्य का संकेत है। एक ओर भाजपा नेतृत्व को लेकर विपक्षी दल हमलावर हैं, तो दूसरी ओर भाजपा से जुड़े नेता विपक्षी दलों पर तीखे प्रहार कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, कोश्यारी और MNS के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, जिससे महाराष्ट्र की सियासत में नई हलचल देखने को मिल सकती है।














