जेवर/ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश ने औद्योगिक विकास के साथ-साथ डिजिटल क्रांति की दिशा में भी ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। एएम ग्रुप और उत्तर प्रदेश सरकार की निवेश प्रोत्साहन एजेंसी ‘इन्वेस्ट यूपी’ के बीच हुए महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में 1 गीगावॉट (GW) क्षमता का अत्याधुनिक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब स्थापित किया जाएगा।
करीब 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक) के निवेश वाली यह परियोजना राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश के डिजिटल बुनियादी ढांचे को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। इसे भारत के सबसे बड़े एआई-आधारित डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक बताया जा रहा है।
289 एकड़ में विकसित होगा मेगा डिजिटल कैंपस
YEIDA द्वारा सेक्टर-28 में 114 एकड़ और सेक्टर-8D में 175 एकड़ भूमि के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) जारी किया गया है। कुल 289 एकड़ में फैला यह डिजिटल कैंपस चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा।
परियोजना की योजना के अनुसार:
वर्ष 2028 तक प्रथम चरण का संचालन प्रारंभ हो जाएगा।
वर्ष 2030 तक पूर्ण 1 गीगावॉट क्षमता हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
यह हब लगभग 5 लाख अत्याधुनिक हाई-परफॉर्मेंस चिपसेट्स से सुसज्जित होगा, जो बड़े पैमाने पर एआई मॉडल प्रशिक्षण, डेटा प्रोसेसिंग और क्लाउड सेवाओं के लिए उपयोग किए जाएंगे।
24×7 कार्बन-फ्री ऊर्जा से संचालित होगा हब
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह हरित ऊर्जा आधारित होना है। पवन, सौर और पम्प्ड स्टोरेज जैसी प्रणालियों के माध्यम से 24×7 कार्बन-फ्री ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
यह पहल एएम ग्रुप की ‘कार्बन-न्यूट्रल और सतत अर्थव्यवस्था’ के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। साथ ही, यह उत्तर प्रदेश सरकार के उस विजन को भी मजबूत करती है, जिसके तहत राज्य को देश का अग्रणी एआई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाया जा रहा है।
एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को मिलेगा नया आयाम
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है। प्रस्तावित हब वैश्विक हाइपरस्केलर्स, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स और उद्योगों को विश्वस्तरीय कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराएगा।
एएमजी एआई लैब्स ‘एआई के लोकतंत्रीकरण’ की अवधारणा पर कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य है—
“ऑन-डिमांड इलेक्ट्रॉन से इंटेलिजेंट टोकन तक संपूर्ण वैल्यू चेन तैयार करना।”
ऊर्जा, स्वास्थ्य, ऑटोमोबाइल, विनिर्माण, मीडिया, गेमिंग और क्लाउड सेवाओं जैसे क्षेत्रों के लिए कस्टमाइज्ड एआई समाधान विकसित किए जाएंगे। इससे भारतीय डेवलपर्स और स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक चिपसेट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीधी पहुंच मिलेगी।
रोजगार और निवेश के नए द्वार
इस परियोजना से उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आने की संभावना है। अनुमान है कि इससे हजारों उच्च-कुशल रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
साथ ही निम्न क्षेत्रों में एक मजबूत स्थानीय इकोसिस्टम विकसित होगा:
हार्डवेयर निर्माण
सॉफ्टवेयर विकास
डेटा सेंटर प्रबंधन
विशेषीकृत कूलिंग तकनीक
साइबर सुरक्षा और नेटवर्किंग
यह परियोजना दावोस में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा व्यक्त उस संकल्प की दिशा में ठोस कदम है, जिसमें राज्य को भारत के सबसे बड़े एआई हब में से एक के रूप में विकसित करने की बात कही गई थी।
एएम ग्रुप और ग्रीनको की पृष्ठभूमि
एम/एस एएम ग्रुप, ग्रीनको ग्रुप के संस्थापकों द्वारा प्रवर्तित एक अग्रणी ऊर्जा संक्रमण और प्रौद्योगिकी मंच है। ग्रीनको भारत की प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों में से एक है, जो 20 से अधिक राज्यों में 50 गीगावॉट ऊर्जा अवसंरचना विकसित कर रही है।
ग्रीनको 100 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता वाला विश्व का पहला इंटरकनेक्टेड ऊर्जा भंडारण समाधान विकसित कर रहा है। वहीं, एएमजी हरित अमोनिया, ग्रीन एल्यूमीनियम, ई-मेथनॉल, बायोफ्यूल्स और सतत विमानन ईंधन जैसे नेट-जीरो उत्पादों के विकास में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
रणनीतिक स्थान, वैश्विक पहचान
जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और यमुना एक्सप्रेसवे की उत्कृष्ट कनेक्टिविटी इस परियोजना को रणनीतिक बढ़त देती है। दिल्ली-एनसीआर के निकट स्थित यह एआई हब वैश्विक निवेशकों और टेक कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक डेटा सेंटर नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था का इंजन साबित होगी—जहां ऊर्जा, तकनीक और नवाचार का संगम होगा।
उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक औद्योगिक राज्य की छवि से आगे बढ़ते हुए डिजिटल और एआई क्रांति के अग्रणी केंद्र के रूप में उभरने की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।














