Thursday, February 12, 2026
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जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब लीक मामला: दिल्ली पुलिस ने जोड़ी आपराधिक साजिश की धाराएं, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच तेज

नई दिल्ली: भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब के कथित सर्कुलेशन को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जांच तेज कर दी है। शुरुआती जांच में सुनियोजित आपराधिक साजिश के संकेत मिलने के बाद पुलिस ने एफआईआर में आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) की धाराएं जोड़ दी हैं। साथ ही किताब के प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया को नोटिस जारी कर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।

विदेशों तक पहुंचा कथित सर्कुलेशन

स्पेशल सेल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जांच में यह सामने आया है कि किताब की पांडुलिपि का कथित तौर पर कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों में भी सर्कुलेशन हुआ। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह लीक किसी संगठित नेटवर्क के जरिए किया गया और क्या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय कड़ी मौजूद है।

जांच एजेंसियां डिजिटल ट्रेल, पब्लिशिंग नेटवर्क और संभावित इंटरनेशनल लिंक की भी गहन पड़ताल कर रही हैं। साइबर विशेषज्ञों की मदद से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि पीडीएफ फाइल का मूल स्रोत क्या था और इसे किन प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड या साझा किया गया।

MoD की क्लीयरेंस प्रक्रिया को किया गया बाईपास?

सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि किताब को रक्षा मंत्रालय (MoD) की अनिवार्य क्लीयरेंस प्रक्रिया को कथित तौर पर बाईपास कर लीक किया गया। यदि यह तथ्य पुष्ट होता है, तो मामला और गंभीर हो सकता है, क्योंकि सेना से जुड़े प्रकाशनों के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य माना जाता है।

प्रकाशक से मांगा गया जवाब

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया को जारी नोटिस में कई अहम सवाल पूछे गए हैं। प्रकाशक से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि किताब की पांडुलिपि प्रकाशन से पहले कथित रूप से कैसे सार्वजनिक डोमेन में पहुंच गई। साथ ही यह भी पूछा गया है कि पांडुलिपि की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय किए गए थे।

प्रकाशक ने अपने बयान में कहा है कि यह किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है।

सोमवार को दर्ज हुई थी एफआईआर

इस मामले में सोमवार को एफआईआर दर्ज की गई थी, जब यह सामने आया कि किताब के प्रकाशित होने से पहले उसकी पांडुलिपि का पीडीएफ संस्करण सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कथित रूप से प्रसारित किया गया। जांच टीम यह भी देख रही है कि क्या इस प्रसार में कॉपीराइट, आधिकारिक मंजूरी या अन्य कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।

संसद में उठे मुद्दे के बाद बढ़ा विवाद

मामला उस समय और सुर्खियों में आया जब हाल ही में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चीन से जुड़े मुद्दे पर अपने भाषण के दौरान इस किताब के कुछ अंशों का उल्लेख किया। इसके बाद किताब के कथित लीक और सर्कुलेशन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई।

आगे की जांच पर नजर

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल अब इस पूरे मामले को आपराधिक साजिश के एंगल से देख रही है। जांच का दायरा देश से बाहर तक बढ़ा दिया गया है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि लीक के पीछे कौन लोग या संस्थाएं शामिल हो सकती हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

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