पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व जज और भाजपा सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय के राष्ट्रपति शासन को लेकर दिए गए बयान ने सियासी घमासान तेज कर दिया है। उनके इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘घिसी-पिटी बात’ करार दिया और तंज कसा कि अगर इतनी बेचैनी है तो संयुक्त राष्ट्र का दरवाज़ा खटखटाएं।
पूर्वी मिदनापुर की तमलुक लोकसभा सीट से सांसद गंगोपाध्याय ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में हालात ऐसे बन सकते हैं, जहां राष्ट्रपति शासन लगाने की नौबत आ जाए। उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्य में एक बड़ा घोटाला सामने आने वाला है, जिसके बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह बिगड़ सकती है।
‘बड़े घोटाले के बाद भड़केंगे आंदोलन’
अभिजीत गंगोपाध्याय के मुताबिक, आने वाले दिनों में जिस घोटाले का खुलासा होगा, उससे पूरे राज्य में ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन होंगे। उन्होंने यहां तक दावा किया कि हालात इतने बिगड़ सकते हैं कि 72 घंटे तक लंबी हड़ताल देखने को मिले। उनके अनुसार, लोग लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेंगे और राष्ट्रपति शासन की मांग उठेगी।
TMC का पलटवार: CBI जाएं या संयुक्त राष्ट्र
गंगोपाध्याय के इस बयान पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखा हमला बोला। पार्टी के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि अगर भाजपा सांसद के पास किसी घोटाले की ठोस जानकारी है, तो उन्हें बयानबाज़ी करने के बजाय सीधे CBI के पास जाना चाहिए।
कुणाल घोष ने तंज कसते हुए कहा,
“अगर उन्हें पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करवाने की इतनी ही जल्दी है, तो इस प्रस्ताव के साथ संयुक्त राष्ट्र क्यों नहीं चले जाते?”
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के बयान नए नहीं हैं और बंगाल की जनता आज भी तृणमूल कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ी है।
जज से नेता तक का सफर
अभिजीत गंगोपाध्याय कलकत्ता हाई कोर्ट के जज रहते हुए अपने कई ऐतिहासिक फैसलों को लेकर राष्ट्रीय चर्चा में रहे। खासतौर पर स्कूल नौकरी घोटाले में CBI और ED जांच का रास्ता खोलने वाले उनके आदेशों ने बंगाल की राजनीति को हिला दिया था। इस मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री और TMC नेता पार्थ चटर्जी समेत कई प्रभावशाली लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
लोकसभा चुनाव 2024 से पहले उन्होंने हाई कोर्ट के जज पद से इस्तीफा दिया, भाजपा जॉइन की और तमलुक सीट से चुनाव लड़कर संसद पहुंचे।














