नोएडा — सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत ने अब सिर्फ एक हादसा नहीं रह गया। जांच में रोज़ नए खुलासे हो रहे हैं — दो और बिल्डरों की गिरफ़्तारी, पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन पर मुकदमे और सबसे चौंकाने वाली बात: साल 2022 में ही नोएडा प्राधिकरण को भेजी गई लिखित चेतावनी में यहां की स्थिति को ‘रेड अलर्ट’ बताया गया था। उस चेतावनी के बावजूद न तो मरम्मत कराई गई और न ही सुरक्षा-बंदोबस्त सुनिश्चित किया गया — जिसका खामियाजा युवराज ने अपनी जान देकर चुकाया।
ताज़ा गिरफ्तारी और मामला
नोएडा पुलिस ने लोटस ग्रीन प्रोजेक्ट से जुड़े दो और बिल्डरों को गिरफ्तार किया है — रवि बंसल (पुत्र प्रकाश चंद), निवासी मंगलम रेजिडेंसी, फरीदाबाद; और सचिन करनवाल (पुत्र गोपाल करनवाल), निवासी शालीमार गार्डन एक्सटेंशन-2, गाज़ियाबाद। इससे पहले अर्थम बिल्डर के अभय सिंह को गिरफ्तार कर 6 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।
पर्यावरण और प्रदूषण के खिलाफ नया मुक़दमा
नॉलेज पार्क कोतवाली में Lotus Green Construction Pvt. Ltd. और Wish Town के भागीदारों के खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया गया है। नामजद आरोपियों में अभय कुमार, मनोज कुमार, संजय कुमार, अचल वोहरा और निर्मल शामिल बताए जा रहे हैं।
2022 की चेतावनी — प्रशासन का बेमुख होना
सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि मार्च 2022 में एमजेड विजटाउन प्लानर्स ने नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ को एक आधिकारिक पत्र भेजा था। पत्र में कहा गया था कि सेक्टर-150 के प्लॉट (SC/02, A-3) पर:
सीवरेज और ड्रेनेज लाइनें टूट चुकी हैं,
बेसमेंट में सीवेज का पानी भर चुका है,
मिट्टी का कटाव तेज़ी से बढ़ रहा है,
सड़क धंसने का हमेशा खतरा बना हुआ है — और साफ शब्दों में चेतावनी दी गई: “यदि तत्काल मरम्मत नहीं की गई तो किसी भी व्यक्ति के साथ जानलेवा हादसा हो सकता है।”
यह पत्र योजनाबिभाग, कार्य विभाग, स्थानीय थाना प्रभारी और नोएडा डीसीपी/पुलिस आयुक्त को भी भेजी गई प्रतियों के साथ दिया गया था — तथापि कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हटवाई गई बैरिकेडिंग और उठते सवाल
मामले में यह भी सामने आया है कि उस भूखंड पर चार साल पहले लगी टिन-शीट बैरिकेडिंग को प्राधिकरण ने हटवा दिया था और बिल्डर पर 6 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 2022 में अवैध यूनिपोल/होर्डिंग के खिलाफ की गई कार्रवाई की सूची में अर्थम बिल्डर का नाम शामिल था — पर जिस गड्ढे में युवराज की कार जा गिरी, वहां कोई यूनीपोल नहीं था; वहां 15-फुट ऊँची टिन-शीट बैरिकेडिंग लगी थी। सवाल यही बनता है: क्या यदि वैसी ही बैरिकेडिंग मौजूद रहती तो युवराज की तेज़ रफ्तार कार सीधे पानी भरे गड्ढे में नहीं गिरती?
अदालत ने मांगा जवाब — अगली सुनवाई 27 जनवरी
गौतमबुद्धनगर के सीजेएम कोर्ट ने मामला गंभीर माना है और अभय सिंह की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखते हुए जांच अधिकारी से यह जानकारी माँगी है कि उस भूखंड से बैरिकेडिंग हटवाने का आदेश किस अधिकारी ने दिया था। अगली सुनवाई 27 जनवरी को निर्धारित है।
हादसा या व्यवस्था की गलतियाँ?
युवराज मेहता की मौत अब एक व्यक्तिगत दुख नहीं, बल्कि चेतावनियों की अनदेखी, विभागीय लापरवाही और सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन चुकी है। फिलहाल जांच में बिल्डरों के खिलाफ कारवाई तेज हुई है — पर असली परिक्षा यह होगी कि क्या जांच की आंच केवल बिल्डरों तक सीमित रहेगी या प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों और उन निर्णयों तक भी पहुँचती है जिनकी वजह से खतरनाक स्थिति बनी रही। जनता और पीड़ित परिवार दोनों को अब स्पष्ट जवाब और कड़ी जवाबदेही की उम्मीद है।














