लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की कानूनी और राजनीतिक गतिविधियां एक बार फिर सुर्खियों में हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ की गई कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में राहुल गांधी 19 जनवरी को सुलतानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश हो सकते हैं। अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराने और अब तक पेश किए गए सबूतों पर सफाई देने का निर्देश दिया है।
यह मामला वर्ष 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उस समय अमित शाह भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। इस टिप्पणी को लेकर सुलतानपुर के बीजेपी नेता विजय मिश्रा ने अगस्त 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
गवाही पूरी, अब बयान का चरण
इस केस में अभियोजन पक्ष के गवाहों से पूछताछ की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। राहुल गांधी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। जुलाई 2024 में कोर्ट में पेशी के दौरान उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि यह मामला राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। अब कोर्ट ने उनके बयान के लिए व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर दी है, जिससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस मामले में राहुल गांधी की मुश्किलें आगे बढ़ सकती हैं।
रायबरेली दौरे के साथ कोर्ट पेशी की तैयारी
इसी बीच राहुल गांधी का तीन दिवसीय रायबरेली दौरा भी तय है, जिससे उत्तर प्रदेश की सियासत और गरमा गई है। राहुल गांधी 19 जनवरी को लखनऊ से सड़क मार्ग के जरिए रायबरेली पहुंचेंगे और भुएमऊ गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे। माना जा रहा है कि सुलतानपुर कोर्ट में पेशी के बाद वे रायबरेली के लिए रवाना हो सकते हैं।
20 जनवरी को राहुल गांधी एक क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वे नगर पालिका अध्यक्ष के घर जाएंगे और ऊंचाहार के रोहनिया क्षेत्र में मनरेगा चौपाल में हिस्सा लेकर स्थानीय लोगों से संवाद करेंगे।
21 जनवरी को भुएमऊ गेस्ट हाउस में संगठनात्मक बैठक प्रस्तावित है, जहां वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करेंगे।
कानून और राजनीति का संगम
राहुल गांधी की संभावित कोर्ट पेशी और रायबरेली दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक टकराव अपने चरम पर है। एक ओर अदालत में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, तो दूसरी ओर राहुल गांधी का यह दौरा कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में संगठन को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कोर्ट की कार्यवाही और राजनीतिक गतिविधियां किस दिशा में मोड़ लेती हैं।














