सरकार द्वारा सिगरेट पर नया उत्पाद शुल्क लगाए जाने के बाद गुरुवार को सिगरेट कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। इस फैसले से देश में सिगरेट की कीमतें बढ़ने की आशंका है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई और शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली।
दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में इस कदम से अनुमानित 10 करोड़ धूम्रपान करने वालों पर सीधा असर पड़ेगा। बाजार खुलते ही सिगरेट बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी आईटीसी और मार्लबोरो सिगरेट की डिस्ट्रीब्यूटर गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयर बुरी तरह टूट गए।
ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयरों में भारी गिरावट
गुरुवार को दोपहर 12:50 बजे आईटीसी का शेयर 8.42 फीसदी गिरकर 369.05 रुपये पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र के दौरान शेयर करीब 10 फीसदी टूटकर 362.70 रुपये तक पहुंच गया, जो लगभग डेढ़ साल का निचला स्तर है। एक दिन पहले बुधवार को आईटीसी का शेयर 402.25 रुपये पर खुला था।
वहीं, मार्लबोरो सिगरेट की डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई। दोपहर 12:50 बजे कंपनी का शेयर 16.50 फीसदी गिरकर 2,306.10 रुपये पर था, जबकि दिन के दौरान यह 19 फीसदी से ज्यादा गिरकर 2,230.15 रुपये तक आ गया। बुधवार को कंपनी का शेयर 2,761.55 रुपये पर बंद हुआ था।
ITC की मार्केट वैल्यू से 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा साफ
नए टैक्स के ऐलान के बाद वैल्यूएशन के लिहाज से सबसे बड़ा झटका आईटीसी को लगा। बुधवार को बाजार बंद होने के समय कंपनी का मार्केट कैप 5,04,917.07 करोड़ रुपये था, जो गुरुवार को घटकर 4,54,425.37 करोड़ रुपये रह गया।
इस तरह एक ही दिन में आईटीसी की वैल्यूएशन में करीब 50,491.7 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
क्या है सरकार का नया टैक्स फैसला?
वित्त मंत्रालय ने फैसला किया है कि 1 फरवरी से सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा।
यह नया शुल्क मौजूदा 40 फीसदी जीएसटी से अलग होगा।
यह कदम सिगरेट पर स्थायी उत्पाद शुल्क व्यवस्था की वापसी को दर्शाता है, जो पिछले कुछ वर्षों से लागू अस्थायी टैक्स सिस्टम की जगह लेगा।
कंपनियों के मुनाफे पर कितना असर?
इस नए टैक्स से सिगरेट कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि इस शुल्क से
75–85 मिमी सिगरेट की कुल लागत में 22% से 28% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
आईटीसी की कुल सिगरेट बिक्री में लगभग 16 फीसदी हिस्सेदारी 75 मिमी से अधिक लंबी सिगरेट की है। अनुमान है कि इस फैसले के बाद इन सिगरेट की कीमत में 2 से 3 रुपये प्रति स्टिक तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
क्या सिगरेट और महंगी होगी?
हालांकि सरकार की ओर से कीमत बढ़ाने को लेकर कोई सीधा निर्देश नहीं है, लेकिन ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि बढ़े हुए टैक्स का बोझ कंपनियां उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं।
उत्पाद शुल्क की वापसी के बाद सिगरेट पर अब 28% जीएसटी, क्षतिपूर्ति उपकर, आकार आधारित शुल्क और नया उत्पाद शुल्क लागू होगा।
इसके बावजूद भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स फिलहाल खुदरा कीमत का करीब 53 फीसदी है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा सुझाए गए 75 फीसदी के स्तर से काफी कम है।
अस्थायी टैक्स की जगह स्थायी कानून
दिसंबर में संसद ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2025 को मंजूरी दी थी, जिससे नई उत्पाद शुल्क व्यवस्था को कानूनी आधार मिला।
सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य राजस्व संग्रह में स्थिरता लाना और तंबाकू कराधान को जन स्वास्थ्य लक्ष्यों के अनुरूप बनाना है।














