Friday, January 16, 2026
Your Dream Technologies
HomeInternational1 जनवरी 2026 से भारत संभालेगा ब्रिक्स की अध्यक्षता, अमेरिकी वर्चस्व के...

1 जनवरी 2026 से भारत संभालेगा ब्रिक्स की अध्यक्षता, अमेरिकी वर्चस्व के लिए बढ़ी चुनौती

भारत 1 जनवरी 2026 से ब्रिक्स (BRICS) समूह की अध्यक्षता ग्रहण करेगा। यह जिम्मेदारी ऐसे समय में मिलने जा रही है जब अमेरिका की आक्रामक टैरिफ नीति ने भारत, चीन और रूस जैसे शक्तिशाली देशों को पहले से कहीं अधिक करीब ला दिया है। मौजूदा वैश्विक हालात में ब्रिक्स का उभार अमेरिका के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वर्ष की शुरुआत में ब्रिक्स सदस्य देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसके बाद से ही ब्रिक्स देशों के बीच आपसी सहयोग और तेज़ हुआ है, जिससे अमेरिका को रणनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर चुनौती मिल रही है।

कृषि और खाद्य सुरक्षा पर ब्रिक्स का फोकस

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स देश कृषि क्षेत्र में अपना योगदान लगातार बढ़ा रहे हैं। भविष्य की खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए साझा नीतियां तैयार की जा रही हैं और खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर ज़ोर दिया जा रहा है।
इसके साथ ही ब्रिक्स देश कृषि, व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहा, तो 2026 के अंत तक अमेरिका को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है और वैश्विक मंच पर उसका प्रभुत्व कमजोर पड़ सकता है।

डॉलर की बादशाहत पर मंडराता खतरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल का उत्पादन, सोने का भंडार, आर्थिक मजबूती और खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता — ये सभी वैश्विक स्तर पर किसी भी समूह की सौदेबाजी की ताकत तय करते हैं।
ब्रिक्स समूह में फिलहाल 11 देश शामिल हैं, जो बीते कुछ वर्षों से अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

कच्चे तेल पर ब्रिक्स की मजबूत पकड़

आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के कुल कच्चे तेल उत्पादन का लगभग 42 प्रतिशत ब्रिक्स सदस्य देशों से आता है। वर्तमान में ब्रिक्स में भारत, चीन, रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं।
ये देश मिलकर वैश्विक जीडीपी में करीब 29 प्रतिशत का योगदान देते हैं, जो उनकी आर्थिक ताकत को दर्शाता है।

रूस, चीन और भारत के रिश्ते हुए और मजबूत

भारत, चीन, रूस और ब्राजील — ये सभी ब्रिक्स के प्रमुख स्तंभ और विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। अमेरिका की टैरिफ नीति के कारण रूस, चीन और भारत के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते और मजबूत होते जा रहे हैं।

ब्रिक्स देशों ने अमेरिकी डॉलर को चुनौती देने की दिशा में एक अहम फैसला लेते हुए आपसी व्यापार को स्थानीय मुद्राओं, खासकर रुपये में करने की आधिकारिक अनुमति दे दी है। इसे अमेरिका के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button