कांग्रेस पार्टी ने ओडिशा के वरिष्ठ नेता और कटक-बाराबती के पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम को ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में बाहर का रास्ता दिखा दिया है। लेकिन सवाल यह है—क्या मोकिम का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने पार्टी के भीतर नेतृत्व संकट, संरचनात्मक जड़ता और विचारधारात्मक भ्रम पर खुलकर बात कर दी?
दरअसल, मोकिम ने कांग्रेस को “फिर से ज़िंदा” करने के लिए गहरे स्ट्रक्चरल, ऑर्गनाइज़ेशनल और आइडियोलॉजिकल बदलावों की ज़रूरत बताई थी। उन्होंने यह मुद्दे पार्टी के अंदर नहीं, बल्कि सार्वजनिक तौर पर उठाए—और यही बात कांग्रेस नेतृत्व को नागवार गुज़री।
कांग्रेस सूत्रों का तर्क
पार्टी सूत्रों का कहना है कि “सीनियर नेताओं की आलोचना करना और पार्टी के अंदरूनी मामलों को सार्वजनिक मंच पर उठाना सीधे-सीधे पार्टी विरोधी गतिविधि है।”
सूत्र यह भी मानते हैं कि मोकिम को अंदाज़ा था कि उनके खिलाफ कार्रवाई होगी—और शायद वे यही चाहते भी थे।
निष्कासन के बाद मोकिम का बयान
पार्टी से निकाले जाने के बाद मोकिम ने बेहद संयमित लेकिन तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा—“राहुल गांधी हमेशा कहते हैं—‘डरो मत’। उन्हीं के नारे से प्रेरित होकर मैंने सोनिया गांधी को पार्टी को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर पत्र लिखा। पार्टी ने मेरी बात सुनने के बजाय मुझे बाहर कर दिया। मुझे कोई पछतावा नहीं है।”
खरगे की उम्र, राहुल से मुलाकात और वेणुगोपाल पर आरोप
अपने पत्र में मोकिम ने सीधे-सीधे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की लीडरशिप पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि “83 साल की उम्र में पार्टी युवाओं से जुड़ने में असफल हो रही है।”
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि वे पिछले तीन साल से राहुल गांधी से मिलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। वहीं कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल पर उन्होंने ‘भाई-भतीजावाद’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
प्रियंका गांधी को बड़ी भूमिका देने की मांग
मोकिम ने सुझाव दिया कि प्रियंका गांधी वाड्रा को सेंट्रल लीडरशिप में निर्णायक भूमिका दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक, इससे पार्टी को नई ऊर्जा मिल सकती है।
ओडिशा कांग्रेस चीफ पर भी हमला
मोकिम यहीं नहीं रुके। उन्होंने ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त दास की काबिलियत पर भी सवाल उठाए और कहा “ओडिशा में कांग्रेस लगातार छह आम चुनाव हार चुकी है, फिर भी कोई आत्ममंथन नहीं हो रहा।”
हालांकि कुछ युवा नेताओं ने मोकिम के विचारों का समर्थन किया, लेकिन सीनियर नेतृत्व उनके साथ खड़ा नहीं हुआ।
पार्टी के भीतर असहमति की सीमा
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा— “हर किसी को राय रखने का अधिकार है, लेकिन AICC लीडरशिप पर सार्वजनिक सवाल उठाना अनुशासनहीनता है।”
यही कारण था कि पार्टी के भीतर पहले से ही माना जा रहा था कि मोकिम पर कार्रवाई तय है।
पहले भी हो चुके हैं सस्पेंड
यह पहली बार नहीं है जब मोकिम पर पार्टी ने सख्ती दिखाई हो।
जुलाई 2023 में, विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले, उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था। विजिलेंस केस में दोषी ठहराए जाने के कारण वे चुनाव नहीं लड़ सके।
बेटी ने संभाली विरासत
इसके बाद कांग्रेस ने कटक-बाराबती सीट से उनकी बेटी सोफिया फिरदौस को टिकट दिया—और उन्होंने 8,000 से ज़्यादा वोटों से जीत दर्ज की।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तटीय ओडिशा में कांग्रेस का संगठन कमजोर होने के बावजूद,
2019 में मोकिम की जीत
और 2024 में उनकी बेटी की जीत
यह दोनों ही उनकी पर्सनल पकड़ और स्थानीय प्रभाव का नतीजा थीं।
बड़ा सवाल
मोहम्मद मोकिम का निष्कासन सिर्फ एक नेता के खिलाफ कार्रवाई है—या फिर यह कांग्रेस के भीतर असहमति से डर, आत्ममंथन की कमी और नेतृत्व संकट की एक और मिसाल?
यह सवाल अब पार्टी से बाहर नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर गूंज रहा है।














