उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। Chandrashekhar Azad ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी Azad Samaj Party (ASP) प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। मुरादाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी ने चुनावी तैयारी अभी से शुरू कर दी है।
नगीना से सांसद आजाद ने कहा कि अब जनता उन नेताओं को पहचान चुकी है जो अधिकारों के नाम पर उन्हें “धोखा” देते रहे हैं। उनके मुताबिक, प्रदेश में बदलाव की लहर है और आगामी चुनाव में मतदाता ऐसे नेताओं को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं।
दलित-पिछड़ा वर्ग केंद्र में
चंद्रशेखर आजाद ने दोहराया कि उनकी राजनीति का मूल उद्देश्य दलित, पिछड़ा और वंचित समाज को हक-अधिकार, सम्मान और न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और युवा घर-घर जाकर संगठन को मजबूत करने का अभियान चला रहे हैं।
उनका दावा है कि बहुजन समाज अब अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अधिक सजग है और 2027 का चुनाव सामाजिक न्याय की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।
UGC गाइडलाइन पर स्पष्ट रुख
कार्यक्रम के दौरान आजाद ने नई UGC गाइडलाइन पर भी अपना समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों को लेकर वह अपना स्टैंड नहीं बदलेंगे, चाहे अदालत का कोई भी फैसला क्यों न आए। उनके अनुसार, शिक्षा और प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर समझौता नहीं किया जाएगा।
2022 का अनुभव और आगे की चुनौती
2022 के विधानसभा चुनाव में ASP ने कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन प्रदर्शन निराशाजनक रहा। खुद चंद्रशेखर आजाद ने गोरखपुर से मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के खिलाफ चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
ऐसे में 2027 में सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा एक बड़ा राजनीतिक दांव मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन विस्तार, मजबूत जमीनी नेटवर्क और व्यापक गठबंधन रणनीति के बिना यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण होगा।
सियासी समीकरणों पर असर?
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में बहुकोणीय मुकाबले की संभावना पहले से ही बन रही है। ऐसे में ASP का हर सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला दलित-पिछड़ा वोट बैंक में नए समीकरण पैदा कर सकता है।
अब देखना होगा कि चंद्रशेखर आजाद की यह रणनीति 2027 में कितनी कारगर साबित होती है और क्या वह प्रदेश की राजनीति में अपनी पार्टी को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर पाते हैं।














