Friday, April 3, 2026
Your Dream Technologies
HomeNationalट्रेनिंग में घायल सैन्य कैडेटों के भविष्य पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, केंद्र...

ट्रेनिंग में घायल सैन्य कैडेटों के भविष्य पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, केंद्र से पूछा—क्या ‘पूर्व सैनिक’ का दर्जा देकर मिल सकता है आरक्षण?

देश के सर्वोच्च न्यायालय Supreme Court of India ने प्रशिक्षण के दौरान घायल या दिव्यांग हो जाने वाले सैन्य कैडेटों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या ऐसे कैडेटों को ‘पूर्व सैनिक’ (Ex-Serviceman) का दर्जा दिया जा सकता है, ताकि उन्हें सरकारी और अर्ध-सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सके।

न्यायमूर्ति Justice B V Nagarathna और न्यायमूर्ति Justice Ujjal Bhuyan की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अधिकतर सैन्य कैडेटों की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच होती है और ट्रेनिंग के दौरान चोट लगने या दिव्यांगता के कारण सेवा से बाहर होने के बाद उनके सामने रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो जाता है।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह सवाल उठा कि क्या प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकीय कारणों से अयोग्य घोषित किए गए कैडेटों को भी पूर्व सैनिक की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। यदि ऐसा किया जाता है तो उन्हें विभिन्न सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों में मिलने वाले आरक्षण और अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल N Venkataraman ने अदालत को आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर सरकार व्यापक और विस्तृत जवाब दाखिल करेगी।

दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) के तहत कर रहा है। यह मामला उन कैडेटों की समस्याओं से जुड़ा है, जिन्हें कठोर सैन्य प्रशिक्षण के दौरान लगी चोट या दिव्यांगता के कारण मेडिकल आधार पर संस्थानों से बाहर कर दिया जाता है।

पिछले वर्ष 18 अगस्त को भी अदालत ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि रक्षा बलों में शामिल होने वाले कैडेट साहसी और समर्पित होते हैं, इसलिए प्रशिक्षण के दौरान लगी चोट या दिव्यांगता से उनका मनोबल नहीं टूटना चाहिए। अदालत ने केंद्र सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि ऐसे कैडेटों के लिए बीमा कवर उपलब्ध कराने की संभावना पर विचार किया जाए।

साथ ही अदालत ने यह सुझाव भी दिया कि विभिन्न सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे कैडेटों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस जैसी योजनाएं शुरू की जाएं, ताकि मृत्यु या दिव्यांगता जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रेनिंग के दौरान दिव्यांग हुए कैडेटों को वर्तमान में दी जाने वाली एकमुश्त सहायता राशि—जो लगभग 40,000 रुपये है—को बढ़ाने पर भी विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि यह राशि उनकी चिकित्सा और पुनर्वास की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

गौरतलब है कि अदालत ने पिछले साल 12 अगस्त को एक समाचार रिपोर्ट के आधार पर इस मुद्दे का स्वतः संज्ञान लिया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि देश के प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों जैसे National Defence Academy और Indian Military Academy में प्रशिक्षण लेने वाले कई कैडेट चोट या दिव्यांगता के कारण बीच में ही बाहर कर दिए जाते हैं।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1985 से अब तक करीब 500 अधिकारी कैडेट ट्रेनिंग के दौरान अलग-अलग स्तर की दिव्यांगता के कारण सैन्य संस्थानों से बाहर हो चुके हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह पहल इन कैडेटों के भविष्य, सम्मान और रोजगार सुरक्षा से जुड़ी नीतियों में बड़ा बदलाव ला सकती है।

- Advertisement -
Your Dream Technologies
VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
VIKAS TRIPATHI भारत देश की सभी छोटी और बड़ी खबरों को सामने दिखाने के लिए "पर्दाफास न्यूज" चैनल को लेके आए हैं। जिसके लोगो के बीच में करप्शन को कम कर सके। हम देश में समान व्यवहार के साथ काम करेंगे। देश की प्रगति को बढ़ाएंगे।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Call Now Button