गाज़ीपुर – समाजवादी पार्टी के दो बड़े नेताओं के बीच मंच से चली बयानबाज़ी ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
अफजाल अंसारी और सपा के कद्दावर नेता व पूर्व एमएलसी काशीनाथ यादव एक बार फिर आमने-सामने दिखाई दिए। यह पूरा घटनाक्रम गाज़ीपुर में पूर्व मंत्री स्व. कैलाश यादव की पुण्यतिथि कार्यक्रम के दौरान सामने आया।
2025 के बयान से शुरू हुआ विवाद
साल 2025 में आयोजित इसी कार्यक्रम में सांसद अफजाल अंसारी ने मंच से यादव समाज को लेकर राजनीतिक संतुलन और त्याग की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि विधायक, एमएलसी, ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और अन्य पदों पर यादव समाज की मजबूत दावेदारी है, लेकिन अगर सरकार बनानी है तो अन्य पिछड़ी व वंचित जातियों—राजभर, कोहार, लोहार, कुशवाहा, नोनिया, तेली आदि—को भी अवसर देना होगा।
उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी के साथ कई समाज जुड़े हैं और उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को भी सम्मान मिलना चाहिए। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और उस समय पार्टी के अंदर और बाहर खूब चर्चा हुई थी।
एक साल बाद काशीनाथ यादव का तीखा पलटवार
एक साल बाद उसी मंच से काशीनाथ यादव ने अफजाल अंसारी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यादव समाज पार्टी मुखिया अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए सैकड़ों बलिदान देने को तैयार है, लेकिन कोई भी नेता यादव समाज को त्याग की नसीहत नहीं दे सकता।
उन्होंने कहा कि “आप सांसद हैं, हमारे नेता नहीं। आप यादव समाज को सलाह देने से पहले खुद त्याग कर दिखाइए। आपके परिवार में विधायक भी हों और सांसद भी—ऐसा क्यों? मोहम्मदाबाद या मऊ सीट पर किसी अन्य बिरादरी के नेता को भी मौका मिल सकता है।”
मंच पर विरोध, लेकिन तेवर बरकरार
काशीनाथ यादव के भाषण के दौरान मंच पर मौजूद कुछ समाजवादी नेताओं ने विरोध जताया, लेकिन उन्होंने कड़े शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि जब एक साल पहले इसी मंच से अफजाल अंसारी ने पूरे यादव समाज को सलाह दी थी, तब भी सभी मौजूद थे और अब भी सुनना पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि अफजाल अंसारी दल बदल की राजनीति करते रहे हैं और केवल पद पर बने रहने के लिए अलग-अलग दलों में जाते रहे हैं, इसलिए यादव समाज को सलाह देना बंद करें।
जवाब के वक्त मंच पर नहीं थे सांसद
इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम संयोग यह भी रहा कि जिस वक्त काशीनाथ यादव ने तेवर के साथ सांसद को जवाब दिया, उस समय अफजाल अंसारी मंच पर मौजूद नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति के कारण मंच पर सीधी बहस की स्थिति नहीं बनी, लेकिन कार्यक्रम के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
2027 चुनाव से पहले अंदरूनी खींचतान के संकेत
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब समाजवादी पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। एक ही मंच से नेताओं के बीच खुलकर बयानबाज़ी ने संकेत दे दिया है कि ज़मीनी स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनाव से पहले संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक समीकरण साधना पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है।














