Friday, January 16, 2026
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यूपी में ब्राह्मण विधायकों को लेकर सियासी हलचल, पीएन पाठक के सहभोज पर पार्टी सख्त

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों ब्राह्मण विधायकों को लेकर सियासत गरमा गई है। इसकी वजह बना 23 दिसंबर को कुशीनगर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक पंचानंद पाठक (पीएन पाठक) के सरकारी आवास पर आयोजित ब्राह्मण विधायकों का एक बड़ा ‘सहभोज’। इस आयोजन के बाद पार्टी के भीतर और बाहर दोनों जगह हलचल तेज हो गई है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद अब विधायक पीएन पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी सफाई दी है। उन्होंने लिखा—
“जय श्री राम, जय सनातन, जय भाजपा। सनातन परंपरा में ब्राह्मण को समाज का मार्गदर्शक, विचारक और संतुलनकर्ता माना गया है। जहां ब्राह्मण एकत्र होता है, वहां ज्ञान, विवेक और चिंतन का मंथन होता है, जो हिंदू अस्मिता को सशक्त करता है। ब्राह्मण का धर्म समाज को जोड़ना है, विभाजन नहीं।”

इस पोस्ट के जरिए पीएन पाठक ने ब्राह्मण समाज की पारंपरिक भूमिका पर जोर देते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि इस सहभोज को किसी भी तरह की राजनीतिक या जातिगत गोलबंदी के रूप में न देखा जाए। साथ ही उन्होंने सनातन मूल्यों, हिंदू अस्मिता और बीजेपी के प्रति अपनी निष्ठा भी स्पष्ट की।

पूर्वांचल और बुंदेलखंड के कई बड़े चेहरे रहे शामिल

सूत्रों के अनुसार 23 दिसंबर की शाम आयोजित इस सहभोज में बीजेपी के करीब 40 से 50 ब्राह्मण विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल हुए थे। इनमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कई प्रमुख नेता मौजूद थे। इस दौरान लिट्टी-चोखा और फलाहार परोसा गया।

विधायकों का कहना है कि इस अनौपचारिक बैठक में SIR, क्षेत्रीय विकास और संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि इस सहभोज में विपक्षी दलों के कुछ ब्राह्मण विधायक भी शामिल हुए थे, लेकिन इस पर अब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। फिलहाल ज्यादातर बीजेपी विधायक इस मुद्दे पर खुलकर बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं।

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की सख्त चेतावनी

ब्राह्मण विधायकों की इस बैठक को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सख्त प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि इस तरह की जातिगत बैठकें और गतिविधियां पार्टी के संविधान और अनुशासन के खिलाफ हैं। पंकज चौधरी ने दो टूक कहा कि बीजेपी में पार्टी अनुशासन से ऊपर कोई नहीं है।

प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान के बाद विपक्षी दलों को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया। विपक्ष ने इसे लेकर बीजेपी पर तंज कसते हुए पार्टी की अंदरूनी खींचतान को उजागर करने की कोशिश की है।

फिलहाल यह मामला शांत होता नहीं दिख रहा और आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में इस मुद्दे पर और बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

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VIKAS TRIPATHI
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