मुर्शिदाबाद से बाग़ी और निलंबित तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर अब कोलकाता की राजनीति में धमाका करने को तैयार हैं। जनवरी के अंतिम सप्ताह या फरवरी की शुरुआत में ब्रिगेड मैदान में होने वाली उनकी रैली सिर्फ़ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि टीएमसी के प्रति सीधा चुनौती स्वरूप मानी जा रही है।
हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के कार्यक्रम की तैयारियों का निरीक्षण करते हुए कहा कि उनका मुख्य मकसद 2026 के विधानसभा चुनाव में “भ्रष्ट तृणमूल सरकार को उखाड़ फेंकना” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रैली बंगाल की राजनीति का टर्निंग पॉइंट साबित होगी और इसके लिए आम जनता का समर्थन जुटाना उनका प्राथमिक लक्ष्य है।
ब्रिगेड मैदान में विरोध का सामना
हालांकि, उनके राजनीतिक अभियान का स्वागत हर जगह नहीं हो रहा। ब्रिगेड मैदान में जब वे पहुंचे, तो कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया और “वापस जाओ” के नारे लगाए। विरोध कर रहे युवकों ने दावा किया कि वे तृणमूल कार्यकर्ता हैं। इस टकराव ने यह संकेत दिया कि हुमायूं कबीर के सामने टीएमसी का स्थानीय तंत्र पूरी तैयारी के साथ खड़ा है।
हुमायूं ने विरोध के बावजूद ज़ोर देकर कहा,
“कोई भी विरोध कर सकता है। हम भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। अगर किसी में हिम्मत है तो हमें गिरफ्तार करके दिखाए।”
यह बयान स्पष्ट करता है कि हुमायूं केवल अपनी नई पार्टी की पहचान बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी पर सीधा हमलावर रणनीति अपना रहे हैं।
10 लाख लोगों की रैली और राजनीतिक संदेश
मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की नींव रखने के बाद टीएमसी और हुमायूं के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। निलंबन के बाद हुमायूं ने अपनी नई पार्टी बनाई और अब वे बंगाल में जनता का गुस्सा और असंतोष अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
उनका दावा है कि ब्रिगेड रैली में करीब 10 लाख लोग जुटेंगे। यह रैली केवल सांकेतिक शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि टीएमसी की पकड़ चुनौती देने वाली रणनीतिक चाल भी मानी जा रही है। बंगाल की सियासत में यह घटना राजनीतिक नीतियों और जनभावना को सीधे प्रभावित कर सकती है।














