प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गुरुवार को कोलकाता में I-PAC (Indian Political Action Committee) के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर की गई छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीखी हलचल मच गई है। इस कार्रवाई के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं अपने अधिकारियों के साथ प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पहुंच गईं।
ईडी का आरोप है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। वहीं, ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए ईडी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले उनकी राजनीतिक रणनीति चुराने के लिए यह रेड कराई गई है।
ED का दावा: 2020 की CBI FIR के आधार पर हुई कार्रवाई
ईडी ने सर्च ऑपरेशन को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि यह कार्रवाई 27 नवंबर 2020 को दर्ज CBI की FIR के आधार पर की गई है। यह FIR अनूप माजी उर्फ लाला और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुई थी। इसी केस के तहत I-PAC से जुड़े ठिकानों की तलाशी ली गई।
कौन है अनूप माजी उर्फ लाला?
अनूप माजी उर्फ लाला का नाम वर्ष 2020 में सामने आए कोयला तस्करी घोटाले की जांच के दौरान उभरा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह पश्चिम बंगाल में सक्रिय एक बड़े कोयला तस्करी सिंडिकेट का सरगना है। आरोप है कि उसके नेतृत्व में यह सिंडिकेट ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की लीज वाली खदानों से अवैध रूप से कोयला निकालकर उसकी तस्करी करता था।
यह अवैध कोयला बांकुड़ा, बर्दवान, पुरुलिया सहित राज्य के कई जिलों में स्थित फैक्ट्रियों को बेचा जाता था। जांच में सामने आया कि इस कोयले का बड़ा हिस्सा शाकंबरी ग्रुप ऑफ कंपनियों को सप्लाई किया गया।
हवाला नेटवर्क और हजारों करोड़ की हेराफेरी का आरोप
जांच एजेंसियों को इस पूरे नेटवर्क में हवाला ऑपरेटरों की संलिप्तता के भी ठोस सबूत मिले हैं। कई गवाहों के बयान और दस्तावेजों से हवाला कनेक्शन की पुष्टि हुई है। ईडी के मुताबिक, अनूप माजी पर करीब 2,742.32 करोड़ रुपये (टैक्स और रॉयल्टी सहित) की कोयला हेराफेरी का आरोप है।
जांच में यह भी सामने आया कि कोयला तस्करी से जुड़े एक हवाला ऑपरेटर ने इंडियन पैक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (I-PAC) के साथ करोड़ों रुपये के लेन-देन में मदद की थी। ईडी का दावा है कि I-PAC भी उन कंपनियों में शामिल थी, जिन तक हवाला का पैसा पहुंचा। इसी कड़ी में ईडी ने I-PAC से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की।
2021 विधानसभा चुनाव से पहले भी उठा था मामला
यह पहली बार नहीं है जब अनूप माजी का नाम बंगाल की राजनीति में चर्चा में आया हो। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भी कोयला तस्करी मामले को लेकर व्यापक राजनीतिक विवाद हुआ था। इस दौरान कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोप सामने आए थे।
इस केस में तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी, उनकी पत्नी और साली से भी पूछताछ की गई थी। वहीं, अभिषेक बनर्जी के करीबी और इस घोटाले के मुख्य आरोपी विनय मिश्रा का नाम भी सामने आया था, जो बाद में फरार हो गया। बताया जाता है कि वह फिलहाल वानुअतु द्वीप में है और वहां की नागरिकता ले चुका है।
सुप्रीम कोर्ट से भी लगा था झटका
कोयला तस्करी मामले के कथित मास्टरमाइंड अनूप माजी अभी भी फरार है। एजेंसियों के अनुसार, उसके दुबई में होने की आशंका है। हालांकि, उसे पहले आसनसोल से गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जमानत मिलने के बाद वह फरार हो गया।
पिछले साल जुलाई में अनूप माजी को उस समय बड़ा झटका लगा था, जब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। उसने दुबई से याचिका दाखिल कर भारत लौटने की अनुमति और सुरक्षा की मांग की थी। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा था कि आरोपी को किसी सुरक्षा की जरूरत नहीं है—उसे भारत लाया जाएगा।














