कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि महिला आरक्षण कानून और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को पास कराने के लिए बुलाया गया “विशेष सत्र” राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी का कहना है कि यह कदम पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे चुनावी राज्यों में असर डालने के उद्देश्य से उठाया गया है और इससे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन होता है।
कांग्रेस महासचिव (संचार प्रभारी) जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 पारित होने के बाद लगभग 30 महीने तक इस मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं की, लेकिन अब चुनावी मौसम में “डबल क्रेडिट” लेने के लिए जल्दबाजी दिखाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा घटनाक्रम केंद्र सरकार की राजनीतिक मंशा को उजागर करता है।
जयराम रमेश ने दावा किया कि परिसीमन को लेकर सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक संचार या स्पष्ट प्रस्ताव सामने नहीं आया है, लेकिन अनौपचारिक रूप से जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार लोकसभा सीटों का पुनर्गठन प्रोपोर्शनल तरीके से नहीं बल्कि छोटे राज्यों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की सीटें बढ़कर 120 तक जा सकती हैं, जबकि केरल जैसे राज्यों को अपेक्षाकृत कम लाभ मिलेगा। कांग्रेस के अनुसार इससे दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और पश्चिमी राज्यों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि इस विशेष सत्र का वास्तविक उद्देश्य पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनावों पर प्रभाव डालना है। उनके अनुसार, यदि सरकार की मंशा केवल विधायी प्रक्रिया थी तो इसे चुनावी माहौल खत्म होने के बाद भी आयोजित किया जा सकता था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस सत्र को 15 दिन बाद नहीं बुलाया जा सकता था।
रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार “नैरेटिव मैनेजमेंट” पर काम कर रही है और राजनीतिक व विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर दबाव महसूस कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार विपक्ष को बिना विश्वास में लिए एकतरफा निर्णय ले रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि 16 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे गए पत्र में केवल नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की बात थी, लेकिन बाद में परिसीमन का मुद्दा भी जोड़ दिया गया।
कांग्रेस के अनुसार, 24 मार्च को सभी विपक्षी दलों ने सरकार से कहा था कि मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने के कारण 29 अप्रैल के बाद ही सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। लेकिन सरकार ने इस सुझाव को नहीं माना। पार्टी ने कहा कि 26 मार्च को एक और पत्राचार के बाद भी उसने यही रुख दोहराया कि सभी दलों को साथ बैठाकर चर्चा की जाए, लेकिन केंद्र ने अंततः विशेष सत्र बुलाने का एकतरफा फैसला कर लिया।
कांग्रेस ने कहा कि यह सत्र ऐसे समय बुलाया जा रहा है जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार चरम पर होगा। पार्टी के मुताबिक, इसी वजह से यह निर्णय चुनावी आचार संहिता के दायरे में सवालों के घेरे में आता है।
सूत्रों के अनुसार, 16 अप्रैल से शुरू होने वाला यह सत्र बजट सत्र के दूसरे हिस्से का भाग है और तीन दिन तक चल सकता है। माना जा रहा है कि इस दौरान लोकसभा की सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 816 करने जैसे संवैधानिक बदलावों पर चर्चा की जा सकती है, जिससे महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।
कुल मिलाकर, कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को चुनावी लाभ से जोड़ रही है, जबकि सरकार की ओर से यह कदम विधायी और संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर चुनावी मंचों तक राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है।
#Hashtags
#Congress #SpecialSession #WomenReservationBill #Delimitation #JairamRamesh #MallikarjunKharge #RahulGandhi #Parliament #ElectionCodeOfConduct #PoliticalNews #IndiaPolitics #BreakingNews














