Friday, January 16, 2026
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चंद्रपूर: किडनी रैकेट का मुख्य सूत्रधार सोलापुर से गिरफ्तार — पीड़ित को कंबोडिया भेजकर किडनी निकाली गई

चंद्रपूर— किडनी रैकेट के मुख्य सूत्रधार को चंद्रपूर पुलिस ने रविवार रात सोलापुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी का नाम ‘कृष्णा’ बताया गया है, जो खुद को ‘डॉ. कृष्णा’ बताकर सोलापुर में रहता था। जिला पुलिस अधीक्षक मुमक्का सुदर्शन ने मंगलवार, 23 दिसंबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। आरोपी को सोमवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां उसे चार दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजा गया।

प्रसंगवश, नागभीड तालुका अंतर्गत मिंथूर गांव के रोशन कुळे नामक एक किसान को निजी साहूकारों के कर्ज के कारण अत्यधिक मानसिक तनाव था। कर्ज चुकाने के उपाय न मिलने पर रोशन ने सोशल मीडिया का सहारा लिया। फेसबुक पर किडनी बिक्री संबंधी खोज के दौरान उनकी मुलाकात ‘डॉ. कृष्णा’ नामक प्रोफाइल से हुई। आरोपी ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर किडनी के बदले 8 लाख रुपये देने का झांसा दिया।

आरोपी ने विमान टिकट और अन्य आवश्यक कागजात कर दिए और रोशन को कंबोडिया भेज दिया गया। वहां के एक निजी अस्पताल में रोशन की किडनी निकाली गई। शल्यक्रिया के बाद तय रकम देने में आरोपी टालमटोल करने लगा — केवल नाम मात्र की कुछ धनराशि दी गई और रोशन को वापस भारत भेज दिया गया। भारत लौटने पर रोशन की सेहत बिगड़ गई और साहूकारों का दबाव भी बना रहा। जब उन्हें अपनी ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने हिम्मत कर के पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस के अनुसार यह एक संगठित रैकेट है जिसका निशाना कर्ज में डूबे किसान, बेरोजगार युवा व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग होते हैं। आरोपी कृष्णा फेसबुक और टेलीग्राम समूहों के माध्यम से जरुरतमंदों की तलाश करता था। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि पता चल सके कि अब तक किस-किस को कंबोडिया भेजा गया है और क्या इस कृत्य में किसी बड़े डॉक्टर या अस्पताल की श्रृंखला का भी सहयोग था। यह भी खंगाला जा रहा है कि रैकेट के अन्य सदस्य कौन-कौन हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उप पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपी ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया है कि उसने स्वयं भी अपनी किडनी बेची है। आरोपी कृष्णा ने पुलिस को बताया कि उसने 2015 में एक छोटी कंपनी शुरू की थी, जो असफल रही और वह कर्ज में डूब गया। आर्थिक तंगी से उबरने के लिए उसने 2015 में कंबोडिया के एक अस्पताल में जाकर अपनी किडनी बेची। 2018 से उसका उसी अस्पताल के संपर्क में रहने का दावा भी आरोपी ने किया है।

अभियुक्त ने पुलिस को बताया कि उसने अब तक 10 से 12 लोगों को किडनी निकालवाने के लिए कंबोडिया भेजा था। पुलिस अभी शिकार हुए अन्य लोगों की पहचान और रैकेट के वित्तीय और चिकित्सकीय कड़ी की पड़ताल कर रही है।

जिला पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर आए ऐसे प्रस्तावों से सचेत रहें; किसी भी तरह की अंग-दान/विक्रय संबंधी अनुचित प्रस्ताव मिलने पर तुरन्त नजदीकी थाने से संपर्क करें और ऐसे सौदों में फंसने से बचें।

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VIKAS TRIPATHI
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