भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की असम इकाई में उस समय हड़कंप मच गया जब पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का एक विवादित वीडियो साझा कर दिया गया। इस वीडियो को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, जिसके बाद पार्टी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अपनी सोशल मीडिया टीम के सह-संयोजक रॉन विकास गौरव को पद से हटा दिया।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से तैयार किया गया था। वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को कथित तौर पर राइफल से निशाना साधते हुए और दो व्यक्तियों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया था। वीडियो में दिख रहे व्यक्तियों में से एक ने टोपी पहन रखी थी, जबकि दूसरे की दाढ़ी थी। इसके साथ ‘प्वाइंट ब्लैंक शॉट’ जैसा कैप्शन भी जोड़ा गया था, जिसने विवाद को और गहरा कर दिया।
यह वीडियो शनिवार शाम को बीजेपी की असम प्रदेश इकाई के आधिकारिक ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर अपलोड किया गया था। हालांकि, विपक्षी दलों की कड़ी आपत्ति और राजनीतिक विरोध के बाद इसे हटा लिया गया। कांग्रेस ने इस वीडियो को गंभीर और भड़काऊ बताते हुए मुख्यमंत्री पर आरोप लगाए।
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह वीडियो बिना उचित जांच-पड़ताल और अनधिकृत तरीके से अपलोड किया गया था। उन्होंने कहा कि पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल पर पोस्ट करने का अधिकार केवल चुनिंदा लोगों को ही होता है। सामान्य कार्यक्रमों या नेताओं के भाषण साझा करने की अनुमति टीम स्तर पर दी जा सकती है, लेकिन संवेदनशील विषयों पर पोस्ट करने से पहले सोशल मीडिया प्रभारी, पार्टी अध्यक्ष या मुख्यमंत्री कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
वरिष्ठ नेता ने यह भी बताया कि रंजीब कुमार शर्मा वर्तमान में बीजेपी की प्रदेश सोशल मीडिया टीम का नेतृत्व कर रहे हैं और रॉन विकास गौरव को हटाए जाने से पहले टीम में चार सह-संयोजक कार्यरत थे।
इस मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस नेताओं की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही, बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने भी इस संबंध में अलग से शिकायत दर्ज कराई है।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को दावा किया था कि उन्हें इस वीडियो की कोई जानकारी नहीं थी। वहीं, कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि इस तरह का वीडियो मुसलमानों के खिलाफ नरसंहार के लिए उकसाने जैसा है और पुलिस से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है, बल्कि सोशल मीडिया पर एआई के दुरुपयोग और संवेदनशील सामग्री के प्रसार को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि वह इस विवाद से दूरी बनाना चाहती है, लेकिन मामला फिलहाल राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।














