नई दिल्ली/विशाखापत्तनम: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में शुरू हुआ Milan 2026 महज एक नौसैनिक अभ्यास नहीं, बल्कि भारत का स्पष्ट रणनीतिक और कूटनीतिक संदेश है। भारतीय नौसेना की मेजबानी में 19 से 25 फरवरी तक चल रहे इस बहुपक्षीय अभ्यास में 70 से अधिक देशों की भागीदारी दर्ज की गई है, जबकि 19–20 देशों ने अपने युद्धपोत भेजे हैं। अभ्यास दो चरणों—हार्बर फेज और सी फेज—में आयोजित हो रहा है।
क्या है ‘मिलन’ और क्यों है अहम?
‘मिलन’ की शुरुआत 1995 में अंडमान-निकोबार से हुई थी। सीमित दायरे से शुरू हुआ यह मंच आज इंडो-पैसिफिक का प्रमुख समुद्री सहयोग अभ्यास बन चुका है।
इसका उद्देश्य है—
मित्र देशों के साथ ऑपरेशनल इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना
साझा समुद्री चुनौतियों (समुद्री डकैती, आपदा राहत, सबमरीन गतिविधियां) से निपटना
क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना
समय के साथ ‘मिलन’ भारत की समुद्री कूटनीति का अहम स्तंभ बन गया है।
भारत की समुद्री ताकत का प्रदर्शन
इस अभ्यास में भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म शामिल हैं—
INS Visakhapatnam — ब्रह्मोस मिसाइल और उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम से लैस स्टील्थ डेस्ट्रॉयर।
INS Shivalik — मल्टी-रोल स्टील्थ फ्रिगेट, पनडुब्बी रोधी क्षमताओं के साथ।
INS Jalashwa — बड़े पैमाने पर सैनिकों की तट पर उतराई (एम्फीबियस ऑपरेशन) में सक्षम।
Boeing P-8I Poseidon — लंबी दूरी की समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन वारफेयर क्षमता वाला विमान।
इसके अलावा MH-60R हेलीकॉप्टर, डोर्नियर विमान और विशेष बलों की स्लिथरिंग व एम्फीबियस डेमो भी अभ्यास का हिस्सा हैं।
गौरतलब है कि इस बार पाकिस्तान, चीन और तुर्किए के युद्धपोत इसमें शामिल नहीं हैं—इसे क्षेत्रीय संतुलन और रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
चीन की बढ़ती मौजूदगी और भारत का संदेश
हिंद महासागर और विशेषकर बंगाल की खाड़ी में चीन की बढ़ती समुद्री सक्रियता—चाहे वह पनडुब्बी गश्त हो या बंदरगाह निवेश—भारत के लिए चिंता का विषय रही है। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास आयोजित कर भारत यह दर्शा रहा है कि इंडो-पैसिफिक में उसका सैन्य और कूटनीतिक नेटवर्क मजबूत और सक्रिय है।
Attended the inaugural ceremony
of MILAN 2026 in Visakhapatnam.MILAN has evolved into one of India’s most credible and consistent maritime engagements. This year, with the participation of 74 nations, MILAN-2026 stands as the largest and most inclusive edition to date. It… pic.twitter.com/1d26H3JJPT
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) February 19, 2026
दूसरी ओर, पाकिस्तान की नौसैनिक क्षमता सीमित मानी जाती है, लेकिन चीन के साथ उसकी बढ़ती समुद्री साझेदारी क्षेत्रीय समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ‘मिलन 2026’ इन चुनौतियों के बीच संतुलन का संदेश देता है।
वैश्विक संतुलन का मंच
इस अभ्यास में अमेरिका, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, ब्रिटेन और ईरान जैसे देशों की भागीदारी उल्लेखनीय है। वैश्विक मतभेदों के बावजूद इन देशों का एक मंच पर आना यह दर्शाता है कि भारत आज एक भरोसेमंद समुद्री साझेदार और कूटनीतिक केंद्र के रूप में उभरा है।
क्वाड देशों—भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया—की संयुक्त मौजूदगी इंडो-पैसिफिक में साझा सुरक्षा दृष्टिकोण को भी रेखांकित करती है।
बंगाल की खाड़ी का सामरिक महत्व
बंगाल की खाड़ी मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाला प्रमुख समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां अभ्यास कर भारत यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि उसकी पूर्वी समुद्री सीमाएं पूरी तरह सतर्क और सुरक्षित हैं।
निष्कर्ष
‘मिलन 2026’ केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि भारत की समुद्री कूटनीति, रणनीतिक आत्मविश्वास और क्षेत्रीय नेतृत्व का प्रदर्शन है। पाकिस्तान-चीन की अनुपस्थिति और विश्व की प्रमुख नौसेनाओं की भागीदारी यह संदेश देती है कि हिंद महासागर क्षेत्र में संतुलन और स्थिरता बनाए रखने में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
बंगाल की खाड़ी से उठी यह रणनीतिक गूंज साफ संकेत है—भारत शांति चाहता है, लेकिन सुरक्षा और सामरिक संतुलन के मामले में पूरी तरह तैयार है।














