दिल्ली में बढ़ते बायोमेडिकल कचरे की चुनौती से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पर्यावरणीय ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से नए कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी (CBWTF) स्थापित किए जाएंगे, जो प्रतिदिन 46 टन तक कचरे के निपटान में सक्षम होंगे।
बुधवार (18 फरवरी) को पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC), पर्यावरण विभाग और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में बायोमेडिकल कचरे की वर्तमान स्थिति, भविष्य की अनुमानित वृद्धि, संयंत्रों की तकनीकी विशेषताओं और कार्यान्वयन की विस्तृत रूपरेखा पर प्रस्तुति दी गई।
2031 तक बढ़ेगा कचरे का दबाव
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली के पूर्व, उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और मध्य क्षेत्रों से लगभग 40 टन प्रतिदिन बायोमेडिकल कचरा उत्पन्न हो रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2031 तक इसमें उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे मौजूदा ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित नए CBWTF संयंत्रों की क्षमता लगभग 46 टन प्रतिदिन रखी गई है। यह क्षमता लगभग 2300 किलोग्राम प्रति घंटा (20 घंटे संचालन के आधार पर) होगी।
बेहतर क्षेत्रीय कवरेज और प्रबंधन
अब तक केवल दो संयंत्र पूरे दिल्ली क्षेत्र को कवर कर रहे थे। नए प्रस्ताव के तहत प्रत्येक संयंत्र तीन-तीन जिलों को कवर करेगा। इससे कचरे के संग्रहण, परिवहन और निपटान में दक्षता बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर समर्पित प्रबंधन संभव होगा।
पूर्व/उत्तर-पूर्व/शाहदरा तथा पश्चिम/दक्षिण-पश्चिम/मध्य क्षेत्रों के लिए अलग-अलग आधुनिक संयंत्र प्रस्तावित किए गए हैं।
आधुनिक तकनीक से होगा सुरक्षित निपटान
नए संयंत्रों में ऑटोक्लेविंग, श्रेडिंग और सुरक्षित लैंडफिल जैसी अत्याधुनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अलग-अलग किए गए बायोमेडिकल कचरे का वैज्ञानिक उपचार किया जाएगा। इससे संक्रमण और पर्यावरण प्रदूषण के जोखिम में कमी आएगी।
मंत्री सिरसा ने कहा कि बायोमेडिकल कचरे का उचित निपटान नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। अनियंत्रित और अवैज्ञानिक तरीके से निपटाया गया कचरा गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है, जिसे सरकार सख्ती से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
नए पार्टनर्स को मिलेगा अवसर
सरकार अत्याधुनिक तकनीक से लैस और सभी वैधानिक पर्यावरण मानकों का पालन करने वाले नए साझेदारों को आमंत्रित करेगी। जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि केवल सर्वोच्च तकनीकी मानकों को पूरा करने वाली कंपनियों को ही अवसर दिया जाएगा।
निगरानी के लिए बनेगा डैशबोर्ड
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दैनिक निगरानी डैशबोर्ड भी स्थापित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से कचरे की मात्रा, उपचार प्रक्रिया और संयंत्रों की कार्यक्षमता पर नजर रखी जाएगी।
मंत्री ने कहा कि यह पहल सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के अनुरूप है। स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली के निर्माण में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को मूल आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार पूरी तरह गंभीर है।
दिल्ली में प्रस्तावित ये अत्याधुनिक संयंत्र न केवल बढ़ते बायोमेडिकल कचरे की समस्या का समाधान करेंगे, बल्कि जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।














