लखनऊ:उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को सख्ती से लागू करते हुए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने चल-अचल संपत्ति का विवरण तय समयसीमा तक न देने वाले करीब 68 हजार सरकारी कर्मचारियों की सैलरी रोक दी है। सरकार का साफ संदेश है—जब तक संपत्ति का पूरा ब्यौरा नहीं दिया जाएगा, तब तक वेतन जारी नहीं होगा।
मानव संपदा पोर्टल पर देना था संपत्ति का विवरण
सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत प्रदेश के 8,66,261 सरकारी कर्मचारियों को वर्ष 2025 तक की अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य था। इस संबंध में सभी विभागों के नोडल अधिकारियों और आहरण-वितरण अधिकारियों को पहले ही स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके थे।
इसके बावजूद शनिवार रात तक 68,236 कर्मचारियों ने संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया, जिसके बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी सैलरी रोकने का फैसला लिया।
सबसे ज्यादा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी चपेट में
जिन कर्मचारियों की सैलरी रोकी गई है, उनमें सबसे अधिक संख्या तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों की है।
तृतीय श्रेणी: 34,926 कर्मचारी
चतुर्थ श्रेणी: 22,624 कर्मचारी
द्वितीय श्रेणी: 7,204 अधिकारी
प्रथम श्रेणी: 2,628 अधिकारी
अन्य कार्मिक: 854 कर्मचारी
यह आंकड़े बताते हैं कि सरकार की कार्रवाई किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी स्तरों पर नियमों को समान रूप से लागू किया गया है।
इन विभागों में सबसे ज्यादा लापरवाही
संपत्ति का विवरण न देने वाले कर्मचारियों में लोक निर्माण, राजस्व, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, समाज कल्याण, महिला कल्याण, सहकारिता, आबकारी, खाद्य एवं रसद, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण अभियंत्रण, उद्यान, पशुधन और परिवहन विभाग प्रमुख रूप से शामिल हैं।
फरवरी में नहीं मिलेगी जनवरी की सैलरी
सरकार के फैसले के तहत जिन कर्मचारियों ने संपत्ति का ब्यौरा नहीं दिया है, उन्हें जनवरी माह की सैलरी फरवरी में नहीं मिलेगी। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने पहले ही विभागाध्यक्षों और कार्यालय प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दे दिए थे कि समयसीमा के बाद किसी भी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश की दिशा में सख्त संदेश
योगी सरकार का यह कदम साफ तौर पर दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करने वाली है। माना जा रहा है कि इस सख्त कार्रवाई के बाद शेष कर्मचारी जल्द ही अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अपलोड करेंगे और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही और मजबूत होगी।














