महाराष्ट्र के बारामती में हुआ विमान हादसा अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई निर्णायक पलों और फैसलों की जटिल कहानी बनता जा रहा है। इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत कुल पांच लोगों की जान चली गई। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे हादसे के पीछे की परिस्थितियां और फैसले सामने आ रहे हैं।
हादसे के बाद दिल्ली में चार्टर विमान ऑपरेटर कंपनी VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (VSR Aviation) के निदेशक और मुख्य मालिक विजय कुमार सिंह ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी। उनका कहना है कि प्रारंभिक संकेत यही देते हैं कि पायलट शायद रनवे देख नहीं पाए होंगे, हालांकि वे अत्यंत अनुभवी थे।
दो अप्रोच, एक मुश्किल फैसला
विजय कुमार सिंह के अनुसार, लैंडिंग का फैसला पूरी तरह पायलट का था। पहले विमान ने रनवे 29 से अप्रोच किया, लेकिन यह प्रयास असफल रहा। इसके बाद पायलट ने एक और कोशिश की और रनवे 11 से लैंड करने का निर्णय लिया। यही वह क्षण था, जब हालात हाथ से निकलते चले गए।
उन्होंने कहा,
“लैंडिंग का फैसला पायलट का होता है। वह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुआ। हम इस त्रासदी से टूट गए हैं और सबसे पहले उन परिवारों के साथ खड़े हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है।”
अनुभव पर कोई सवाल नहीं
हादसे में जान गंवाने वाले पायलट कैप्टन सुमित कपूर को लेकर विजय कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि उनके पास 16,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव था। को-पायलट शंभवी पाठक के पास भी करीब 1,500 घंटे का अनुभव था।
कैप्टन कपूर इससे पहले सहारा, जेटलाइट और जेट एयरवेज जैसी बड़ी एयरलाइंस के साथ काम कर चुके थे और इस श्रेणी के विमानों पर उन्हें लंबा अनुभव था।
विजय सिंह भावुक होते हुए कहते हैं,
“सुमित मेरे दोस्त नहीं, भाई जैसे थे। उनका बेटा भी हमारे साथ पायलट है। शंभवी मेरी बेटी जैसी थीं। दोनों बेहतरीन पायलट और बेहतरीन इंसान थे।”
मेंटेनेंस पर उठे सवाल और सीधा जवाब
विमान के मेंटेनेंस को लेकर उठ रहे सवालों को विजय कुमार सिंह ने सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि विमान पूरी तरह सुरक्षित और एयरवर्दीनेस मानकों पर खरा था।
उन्होंने कहा,
“मैं अपने ही विमान को ग्राउंड क्यों करूंगा? हमारे सभी विमान सुरक्षित हैं। जहां तक हमें जानकारी है, विमान में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी।”
पुराने हादसों की तुलना पर आपत्ति
2023 में मुंबई एयरपोर्ट पर हुए एक अन्य विमान हादसे का हवाला दिए जाने पर विजय सिंह ने सवाल उठाया कि उस घटना को मौजूदा हादसे से जोड़ना अनुचित है। उनके मुताबिक, वह एक अलग परिस्थिति में हुआ हादसा था, जहां भारी बारिश और कम दृश्यता के कारण टचडाउन के बाद विमान फिसल गया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच की दिशा
हादसे के बाद देश की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई बड़े नेताओं ने उच्चस्तरीय और पारदर्शी जांच की मांग की है।
फोरेंसिक टीम घटनास्थल से सैंपल एकत्र कर रही है, जबकि DGCA और AAIB की जांच भी जारी है। DGCA के अनुसार, विमान में सवार सभी पांच लोगों—अजित पवार, विदिप जाधव, पिंकी माली, कैप्टन सुमित कपूर और शंभवी पाठक—की इस हादसे में मौत हो गई।
अब असली सवाल
क्या सीमित दृश्यता निर्णायक वजह बनी?
क्या अनियंत्रित एयरफील्ड ने जोखिम बढ़ाया?
या फिर अंतिम क्षणों का एक फैसला इस त्रासदी की जड़ था?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल बारामती का यह हादसा भारतीय विमानन सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी बनकर उभरा है।














