शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी के विरोध में अयोध्या से एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्यकर विभाग, अयोध्या संभाग में तैनात GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दो पन्नों का इस्तीफा राज्यपाल को भेजते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में यह कदम उठाने की बात कही है। इस्तीफे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
“लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री का अपमान अस्वीकार्य”
अपने इस्तीफे में प्रशांत कुमार सिंह ने स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रदेश के मुखिया हैं और उनका अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि “जिस प्रदेश का नमक खाता हूं और जहां से वेतन मिलता है, उसी प्रदेश और उसके नेतृत्व के साथ खड़ा रहना मेरा कर्तव्य है।”
मानसिक पीड़ा और आत्मसम्मान का हवाला
डिप्टी कमिश्नर ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि शंकराचार्य की टिप्पणी से वे पिछले तीन दिनों से मानसिक रूप से आहत थे। इसी मानसिक पीड़ा और आत्मसम्मान के आधार पर उन्होंने यह कठोर निर्णय लिया। उन्होंने साफ किया कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि पूरी तरह स्वेच्छा और अपने विचारों के अनुरूप लिया गया है।
उत्तर प्रदेश से एक और अफसर का इस्तीफा
अयोध्या में GST के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने @narendramodi मोदी–@myogiadityanath योगी के समर्थन में इस्तीफा दिया।
उन्होंने कहा– “स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा CM योगी आदित्यनाथ पर की गई टिप्पणी से आहत हूं” pic.twitter.com/MjP34315MV
— PARDAPHAAS NEWS (@pardaphaas) January 27, 2026
2023 से अयोध्या में तैनात थे
प्रशांत कुमार सिंह की अयोध्या में पोस्टिंग वर्ष 2023 में हुई थी। वे राज्यकर विभाग में संभागीय उप आयुक्त यानी GST डिप्टी कमिश्नर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद वे अपने निजी संसाधनों से सामाजिक कार्यों में योगदान देंगे।
हालिया प्रशासनिक घटनाओं से जुड़ता मामला
गौरतलब है कि इससे पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने भी UGC के नए नियमों और शंकराचार्य से जुड़े विवादों को लेकर इस्तीफा दिया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। अग्निहोत्री ने जिला प्रशासन और जिलाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए थे और मानसिक दबाव की बात कही थी।
बढ़ता राजनीतिक-प्रशासनिक तापमान
लगातार हो रहे इस्तीफों और बयानों से यह साफ है कि शंकराचार्य की टिप्पणी और उससे जुड़े मुद्दों ने न सिर्फ राजनीतिक बल्कि प्रशासनिक हलकों में भी तीखी बहस छेड़ दी है। अयोध्या से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन चुका है।














