नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर केंद्र सरकार और भाजपा नेता इसे सामाजिक न्याय को मजबूत करने वाला कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का आरोप है कि नियमों की भाषा और लागू करने की प्रक्रिया अस्पष्ट और भेदभावपूर्ण हो सकती है।
निशिकांत दुबे का दावा– ‘मोदी है तो मुमकिन है’
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि UGC की अधिसूचना को लेकर जो भी भ्रम फैलाया जा रहा है, उसे जल्द ही दूर कर दिया जाएगा।
उन्होंने लिखा— “विश्वास रखिए, UGC नोटिफिकेशन की सभी भ्रांतियां दूर होंगी। संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के अनुसार SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग में समानता है।”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सामान्य वर्ग को 10% आरक्षण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही मिला, जबकि मंडल कमीशन के बाद बनी कई सरकारें यह निर्णय नहीं ले सकीं।
मोदी है तो मुमकिन है,विश्वास रखिए UGC नोटिफिकेशन की सभी भ्रान्तियों को दूर किया जाएगा । संविधान को आर्टिकलों 14 एवं 15 के अनुसार अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति,पिछड़े वर्ग और सामान्य वर्ग में कोई फर्क नहीं है। 10 प्रतिशत आरक्षण सामान्य वर्ग को केवल और केवल माननीय प्रधानमंत्री मोदी…
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) January 25, 2026
सोशल मीडिया पर कौन-सी भ्रांतियां फैल रही हैं?
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर कई तरह की अधूरी या भ्रामक जानकारियां वायरल हो रही हैं, जैसे—
“नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों को निशाना बनाया जाएगा”
सच्चाई: अधिसूचना में किसी जाति या वर्ग को सीधे अपराधी नहीं ठहराया गया है, बल्कि भेदभाव की शिकायतों के निवारण की बात की गई है।
“शब्दों या इशारों पर भी तुरंत सजा मिलेगी”
सच्चाई: अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दोष तय करने की प्रक्रिया क्या होगी — यही विपक्ष की मुख्य आपत्ति है।
“झूठे मामलों में भी कार्रवाई होगी”
सवाल यही है: झूठे या दुर्भावनापूर्ण मामलों से निपटने की व्यवस्था अधिसूचना में साफ़ नहीं है।
प्रियंका चतुर्वेदी का सवाल– कानून समावेशी क्यों नहीं?
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि कैंपस में किसी भी तरह का जातिगत भेदभाव गलत है, लेकिन कानून को लागू करते समय स्पष्टता और समानता बेहद ज़रूरी है।
उन्होंने सवाल उठाए—
भेदभाव की परिभाषा क्या होगी?
दोष का निर्धारण कौन करेगा?
झूठे मामलों में क्या सुरक्षा होगी?
उन्होंने मांग की कि या तो यह अधिसूचना वापस ली जाए या इसमें आवश्यक संशोधन किए जाएं।
कैंपस में किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव गलत है, और भारत में पहले ही कई छात्र इसके दुष्परिणाम झेल चुके हैं। लेकिन क्या कानून को समावेशी नहीं होना चाहिए और यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए कि सभी को समान रूप से संरक्षण मिले? फिर कानून के लागू होने में यह भेदभाव क्यों? झूठे मामलों की…
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) January 25, 2026
चंद्रशेखर आज़ाद की चेतावनी– ‘85% लोग सड़कों पर उतरेंगे’
भीम आर्मी प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने तीखा बयान देते हुए कहा कि विरोध वही लोग कर रहे हैं जो जातिगत शोषण को बनाए रखना चाहते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कुछ चुनिंदा लोगों के दबाव में फैसला वापस लिया गया, तो देश की बहुसंख्यक आबादी आंदोलन करेगी।
केशव प्रसाद मौर्य बोले– ‘सवर्ण समाज नाराज़ नहीं’
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि सवर्ण समाज इस मुद्दे पर नाराज़ नहीं है।
उन्होंने कहा—“सरकार किसी को पीछे करने नहीं, बल्कि जो ऐतिहासिक रूप से पिछड़े हैं उन्हें आगे बढ़ाने का काम कर रही है।”
UGC के नए नियमों का उद्देश्य सामाजिक न्याय को मजबूत करना बताया जा रहा है, लेकिन नियमों की अस्पष्ट भाषा और लागू करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल बने हुए हैं।
सरकार जहां भ्रम दूर करने का भरोसा दे रही है, वहीं विपक्ष और छात्र संगठन स्पष्ट दिशानिर्देश और सुरक्षा प्रावधान की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।














