लखनऊ, 26 जनवरी 2026 — उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिए हैं कि 594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेसवे काम फरवरी 2026 के अंत तक पूरा कर लिया जाए। इसका उद्देश्य राज्य की कनेक्टिविटी को ऐतिहासिक मजबूती देना और औद्योगिक-कृषि-लॉजिस्टिक्स गतिविधियों के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।
क्या कहा गया — बैठक के अहम निर्देश
सीएम ने बैठक में कहा कि मेगा-इन्फ़्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं उत्तर प्रदेश को आर्थिक समृद्धि और निवेश के केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं और इन्हें समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। अधिकारियों को काम की गति बढ़ाने, शेष भूमि-समायोजन और गुणवत्तापरक परीक्षणों में तेजी लाने का स्पष्ट आदेश दिया गया।
एक्सप्रेसवे का दायरा — लंबाई, रूट और लाभ
यह एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर का है और रिपोर्टों के मुताबिक यह 12 जिलों से गुज़रता हुआ 500 से अधिक गाँवों को सीधे लाभ पहुंचाएगा। परियोजना से उत्तर प्रदेश के पूर्व-पश्चिम कनेक्शन में उल्लेखनीय कमी और औद्योगिक तथा कृषि आपूर्ति-शृंखलाओं में मजबूती आने की संभावना है।
गुणवत्ता-निगरानी: आधुनिक तकनीक से टेस्टिंग
अधिकारीयों ने बैठक को बताया कि सड़क की गुणवत्ता का आकलन अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप Roughness Index (IRI) और Riding Comfort Index जैसे मानदण्डों के आधार पर किया जा रहा है। साथ ही वास्तविक-समय रोड-क्वालिटी मॉनीटरिंग के लिए सेंसर-आधारित समाधान और क्लाउड-आनालिटिक्स का प्रयोग भी चल रहा है, ताकि किसी भी दोष का तुरंत पता लगाकर सुधार कराया जा सके। इससे राइड-क्वालिटी और दीर्घकालिक रखरखाव लागत दोनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
सुविधाएँ और सुरक्षा — रेस्ट एरिया से लेकर एक्सेस-कंट्रोल तक
परियोजना के निकास-द्वारों पर उच्च-मानक के wayside amenities, विश्राम क्षेत्र, रोड-सेफ्टी फीचर्स, स्पष्ट साइनैज और सख्श एक्सेस-कंट्रोल सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि सर्विस-रोड्स, प्रकाश व्यवस्था और निगरानी प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि एक्सप्रेसवे को लंबी अवधि के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जा सके।
जेवर एयरपोर्ट — फेज-3 भूमि अधिग्रहण में तेजी का निर्देश
सीएम ने नोएडा के जेवर (Noida International) एयरपोर्ट की प्रगति की भी समीक्षा की और फेज-3 के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के लिए वैश्विक कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार सृजन का प्रमुख केंद्र बनेगा और एयर-कार्गो हब के रूप में राज्य की क्षमता बढ़ेगी — इसलिए फेज-3 की तैयारियों को समय पर पूरा किया जाए।
समयरेखा और जनता पर असर
सरकारी ब्योरे के अनुसार, जुड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर इकाइयाँ (टोल-प्लाज़ा, सर्विस-रोड, निगरानी, पौधरोपण व साइनबोर्ड) भी अंतिम चरण में हैं और यदि निर्धारित समयसीमा पर काम पूरा होता है तो यह कई जिलों की अर्थव्यवस्था और रोज़गार पर तुरन्त सकारात्मक प्रभाव डालेगा। परियोजना के खुलेरूप से संचालन से Meerut-Prayagraj यात्रा-समय में भी भारी कटौती आने की सम्भावना जताई जा रही है।
गंगा एक्सप्रेसवे न केवल एक सड़क परियोजना है बल्कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक रूपरेखा बदलने वाले अगले बड़े इंफ्रास्ट्रक्चरल कदमों में से एक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के फरवरी 2026 की समयसीमा-निर्देश से यह स्पष्ट है कि सरकार इसे जल्द-से-जल्द नागरिकों के लिए खोलने के लिए तेज़ी से काम कराना चाहती है — साथ ही गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता भी सुनिश्चित की जा रही है।














