नई दिल्ली, 26 जनवरी 2026 — आज भारत अपना 77वाँ गणतंत्र दिवस देश के राष्ट्रीय प्रतीक कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर मनाएगा। समारोह का विषय इस बार “वंदे मातरम् — 150 साल” तथा “आत्मनिर्भरता और समृद्धि” के रंग में रचा गया है, जो देश की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सामर्थ्य दोनों को एक साथ प्रस्तुत करेगा।
देश के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू परेड की अध्यक्षता कर रही हैं, जबकि यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्ता और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन इस बार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हैं — एक कूटनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धि जिसे व्यापक ध्यान मिल रहा है।
परेड क्या दिखाएगी — सैन्य ताकत और सांस्कृतिक वैभव
कर्तव्य पथ पर इस वर्ष सैन्य प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का ऐसा समन्वय दिखेगा जो आधुनिक भारत की तस्वीर पेश करेगा। वायु प्रदर्शनों में राफेल, Su-30MKI, MiG-29 और जगुआर जैसे लड़ाकू विमान शामिल होंगे — साथ ही रणनीतिक और परिवहन क्षमताओं के फ्लाई-पास भी दिये जाएंगे। परेड में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी प्रतिनिधि फॉर्मेशन और आधुनिक प्रणालियों का प्रदर्शन भी समाहित है, जो देश की बढ़ती रक्षा क्षमताओं को दर्शाता है।
इस साल कुल 30 झांकियाँ — जिनमें 17 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों व 13 मंत्रालयों/विभागों की झांकियाँ शामिल हैं — ‘वंदे मातरम्’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की थीम पर कर्तव्य पथ से गुज़रेंगी, जिससे परंपरा और विकास का संगम दिखेगा।
दर्शक—जनभागीदारी और विशेष आमंत्रित
केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय ने लगभग 10,000 विशेष-अतिथियों (उनके पत्नियों/पतियों सहित) को परेड देखने के लिए आमंत्रित किया है — इनमें इनोवेटर्स, श्रेष्ठ किसान, स्वयं सहायता समूह, स्टार्ट-अप प्रतिनिधि और समाज के वे लोग शामिल हैं जिन्होंने आय व रोजगार सृजन में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इससे परेड में जनभागीदारी और समावेशिता दोनों को प्रमुखता मिली है।
सुरक्षा — हर कदम पर सतर्क निगरानी
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं — लगभग 10,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। पहली बार बड़े पैमाने पर AI-सक्षम स्मार्ट ग्लासेस, चेहरा-पहचान तकनीक और हजारों से अधिक CCTV कैमरों के जरिए सतत निगरानी पर बल दिया जा रहा है; कंट्रोल रूमों में हजारों अधिकारियों द्वारा 24×7 मॉनिटरिंग चल रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे का त्वरित जवाब दिया जा सके।
परेड की कुछ खास झलकियाँ (हाइलाइट्स)
फ्लाई-पास में कई फॉर्मेशन होंगे जिनमें विशेष कर 2 राफेल, 2 Su-30, 2 MiG-29 और 1 जगुआर की ‘स्पीयरहेड’ फॉर्मेशन शामिल है — यह ऑपरेशन-सिंदूर फॉर्मेशन का प्रतीक भी माना जा रहा है।
इस बार परेड में ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्टम, अर्जुन टैंक और नवीनतम रोबोटिक/यूजीवी प्रदर्शनों का प्रदर्शन होने की जानकारी है।
पहली बार नवगठित विशेष इकाइयाँ और कुछ अनूठे पशु-दल (जैसे ज़ांस्कर पोनी और बैक्ट्रियन ऊँट) भी परेड का हिस्सा दिखेंगे — यह परंपरा और विविधता का रंग बढ़ाएगा।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और जनता की भागीदारी
परिव्यापक सांस्कृतिक कार्यक्रमों में 2,500 से अधिक कलाकार प्रदर्शन कर रहे हैं; राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष संगीत-नाट्य व चित्रण भी मंचित होंगे। राज्यों-के-झांकियों के माध्यम से भारत की लोककला, हस्तकला और आर्टिफैक्ट्स का समेकित प्रदर्शन होगा, जो राष्ट्र-निर्माण की कहानी और स्वदेशी प्रयासों को दर्शाएगा।
समारोह का क्रम और समापन
समारोह की शुरुआत सुबह राष्ट्रपति के परेड-दर्शन से होगी; प्रधानमंत्री पहले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि देंगे और उसके बाद परेड का औपचारिक आरम्भ होगा। परेड का समापन राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम्’ के साथ भव्य तरीके से होगा — गुब्बारे और सांकेतिक समापन क्रियाएँ कार्यक्रम के आख़िरी भाग में शामिल हैं।
77वाँ गणतंत्र दिवस ऐतिहासिक और प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है — जहाँ भारत कूटनीति, आधुनिक रक्षा-प्रभावशाली क्षमता और मल्टीकल्चरल विरासत को एक साथ दुनिया के समक्ष पेश कर रहा है। कर्तव्य पथ पर आज दिखने वाला यह समागम राष्ट्र-गौरव के साथ-साथ आने वाले वर्षों में भारत के बदलते चेहरों का संदेश भी देगा।














