Friday, January 23, 2026
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JusticeForYuvraj: युवराज मेहता मौत मामला: बिल्डर की गिरफ्तारी, CEO पर गाज—लेकिन क्या पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय होगी?

नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले ने अब पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां पुलिस ने इस मामले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए नामजद बिल्डर अभय कुमार सिंह (मालिक, एमजेड विसटाउन) को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल तेज हो गया है कि क्या सिर्फ बिल्डर की गिरफ्तारी और नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को हटाना ही इस मामले में पर्याप्त कार्रवाई है।

स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार का कहना है कि यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि अफसरों की घोर लापरवाही से हुई “संस्थागत हत्या” बन चुका है। उनका आरोप है कि जब तक नोएडा प्राधिकरण के सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक युवराज को न्याय नहीं मिलेगा और न ही शहर के लोगों को सुरक्षा का भरोसा।

कई विभागों की लापरवाही का आरोप

आरोप है कि हादसे के लिए केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि नोएडा प्राधिकरण के कई वरिष्ठ अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। इनमें GM NTC और SM WC-10, जिनके विभाग की लापरवाही के कारण मौके पर जरूरी कार्य और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए, GM प्लानिंग और GM ग्रुप हाउसिंग, जिनकी अनुमति और निगरानी में खतरनाक गड्ढे बने,को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब तक इन अधिकारियों को हटाकर उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक किसी एक व्यक्ति को बलि का बकरा बनाना न्याय नहीं माना जा सकता।

DDMA की भूमिका पर भी सवाल

घटना के समय DDMA (जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) से जुड़े अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद समय पर प्रभावी रेस्क्यू शुरू नहीं हो सका। आरोप है कि मौके पर हालात देखने के बाद भी युवराज को बचाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए, जो प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।

ना बैरिकेडिंग, ना चेतावनी बोर्ड

हादसे वाली जगह पर पानी से भरा गहरा गड्ढा मौजूद था, लेकिन

न कोई बैरिकेडिंग की गई थी,

न चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे,

न ही सड़क को बंद किया गया था।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस खतरनाक स्थिति की शिकायतें पहले भी की गई थीं, लेकिन नोएडा अथॉरिटी के एक ACEO ने शिकायतकर्ताओं को डांटकर भगा दिया और यहां तक कह दिया कि “सुप्रीम कोर्ट जाना है तो चले जाएं।”

रेस्क्यू सिस्टम की भी खुली पोल

हादसे के दौरान रेस्क्यू सिस्टम की गंभीर खामियां सामने आईं। आरोप है कि

फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन उनके पास लाइफ जैकेट तक नहीं थीं,

कोई भी कर्मी पानी में उतरने को तैयार नहीं हुआ,

पुलिसकर्मी सिर्फ रस्सियां फेंकते रहे,

स्थानीय लोगों को पानी में उतरकर बचाव करने से रोका गया।

लोगों का कहना है कि यदि समय पर सही संसाधन और इच्छाशक्ति होती, तो शायद युवराज की जान बचाई जा सकती थी।

बिल्डर गिरफ्तार, JE सस्पेंड

इस मामले में युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें एमजेड विसटाउन और लोटस ग्रीन को नामजद किया गया। जांच के बाद पुलिस ने एमजेड विसटाउन के मालिक अभय कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, नोएडा प्राधिकरण के एक जूनियर इंजीनियर (JE) को भी निलंबित किया गया है, जिससे प्रशासनिक लापरवाही की पुष्टि होती है।

दो बेसमेंट के बीच फंसी मिली कार

मंगलवार को NDRF और गोताखोरों की टीम ने करीब तीन घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद युवराज की कार को दो बेसमेंट के बीच फंसी हुई हालत में खोज निकाला। हादसे वाले दिन केवल शव बरामद हुआ था, कार को निकालना संभव नहीं हो सका था। फिलहाल कार को बाहर निकालने की तैयारी जारी है।

SIT रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एडीजी जोन मेरठ भानु भास्कर के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय SIT को पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। SIT ने मौके का निरीक्षण किया और नोएडा प्राधिकरण में अधिकारियों से घंटों पूछताछ की है।

अब सवाल यह है कि क्या SIT की रिपोर्ट केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी, या फिर उन सभी अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करेगी, जिनकी लापरवाही ने एक युवा इंजीनियर की जान ले ली।

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