प्रयागराज के संगम तट पर मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई, लेकिन इसी दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सुबह संगम स्नान से इनकार कर दिया और आरोप लगाया कि उनके शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा मारपीट की गई। इस घटना ने धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तीखी बहस को जन्म दे दिया है।
पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्थिति के लिए शंकराचार्य और उनके समर्थकों के व्यवहार को जिम्मेदार ठहराया है। प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुबह करीब 9 बजे उस क्षेत्र में पहुंचे, जिसे सुरक्षा कारणों से एक दिन पहले ही बंद कर दिया गया था। यह निर्णय भारी भीड़ और संभावित भगदड़ की आशंका को देखते हुए लिया गया था।
पुलिस और समर्थकों में झड़प, बैरिकेडिंग तोड़ने का आरोप
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, शंकराचार्य और उनके करीब 200 समर्थक एक रथ के साथ संगम नोज तक जाने की जिद पर अड़ गए, जो परंपरा और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ था। समझाने के बावजूद उन्होंने वापसी का रास्ता लगभग तीन घंटे तक रोक दिया, जिससे वहां अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान बैरिकेड्स तोड़े गए और समर्थकों ने बच्चों को आगे कर हंगामा किया। पूरी घटना CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई है।
जोगेंद्र कुमार ने कहा, “यहां आने वाला हर श्रद्धालु बराबर है। किसी भी संत या व्यक्ति को परंपरा के खिलाफ विशेष सुविधा नहीं दी जा सकती। अगर रथ और इतने लोगों के साथ आगे बढ़ने दिया जाता, तो भगदड़ मच सकती थी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी CCTV के माध्यम से की जा रही है और किसी प्रकार के भेदभाव का सवाल ही नहीं उठता।
#WATCH | Prayagraj, UP | Police Commissioner of Prayagraj, Jogendra Kumar, says, “Swami Avimukteshwaranand came here around 9 am, to this place which has been closed since yesterday due to security reasons. He and his followers had a scuffle with the police. They even broke the… pic.twitter.com/odthBU6cVL
— ANI (@ANI) January 18, 2026
आखिरकार, तीन घंटे के गतिरोध के बाद शंकराचार्य अपने समर्थकों के साथ आश्रम लौट गए। पुलिस ने कहा है कि CCTV फुटेज के विश्लेषण के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
राजनीति भी गरमाई, अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
इस मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि माघमेला क्षेत्र में साधु-संतों और श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार अक्षम्य है और यह पिछले वर्ष की घटनाओं की पुनरावृत्ति है। अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि सदियों पुरानी शाही स्नान की सनातनी परंपरा में बार-बार विघ्न क्यों डाले जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “मौनी अमावस्या का शाही स्नान कोई नई परंपरा नहीं है। इसके बावजूद ऐसी घटनाएं भाजपा सरकार में ही क्यों हो रही हैं? इसके लिए नाकाम व्यवस्था और कुशासन जिम्मेदार है।”
अखिलेश यादव ने प्रशासन पर अहंकार का आरोप लगाते हुए कहा कि “मुख्य को हर जगह मुख्य बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर गृह सचिव मनमानी कर रहे हैं तो यह भी गलत है और अगर किसी के निर्देश पर कर रहे हैं तो और भी गंभीर मामला है।” उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की।
श्रद्धा, परंपरा और व्यवस्था के बीच टकराव
मौनी अमावस्या जैसे पवित्र अवसर पर सामने आए इस विवाद ने प्रशासनिक व्यवस्था, धार्मिक परंपराओं और राजनीतिक टकराव को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की निगाहें जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।














